Rahu Ketu Movie Review: पुलकित–वरुण की जोड़ी ने कराई कॉमेडी की नॉन-स्टॉप राइड, जान लीजिए फिल्म देखने की वजहें
Rahu Ketu Movie Review: इस हफ्ते सिनेमाघरों में आई फिल्म 'राहु केतु' एक बार फिर साबित करती है कि जब पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा एक ही फ्रेम में होते हैं, तो कॉमेडी अपने आप रफ्तार पकड़ लेती है। फिल्म शुरू से ही यह साफ कर देती है कि इसका इरादा किसी भारी संदेश या जटिल कहानी में उलझाने का नहीं, बल्कि दर्शकों को खुलकर हंसाने और हल्का-फुल्का मनोरंजन देने का है। दोस्ती, सिचुएशनल हास्य और हल्की जादुई किताब की कॉमेडी के सहारे यह फिल्म कॉमेडी से अलग पहचान बनाती है।

कहानी
फिल्म की कहानी हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से शुरू होती है, जहां लेखक चूरू लाल शर्मा (मनु ऋषि चड्ढा) अपनी ज़िंदगी और लेखन-दोनों से ही निराश चल रहा है। उसी दौरान उसकी मुलाकात होती है रहस्यमय फूफा (पियूष मिश्रा) से, जिनके पास एक ऐसी जादुई किताब है, जो हालात को पूरी तरह उलट-पुलट कर देती है।
इस किताब के ज़रिये कहानी में प्रवेश करते हैं राहु (वरुण शर्मा) और केतु (पुलकित सम्राट)-दो मासूम लेकिन बेहद उलझनभरे किरदार। इनकी मौजूदगी जहां भी होती है, वहां भ्रम, डर और ठहाके साथ-साथ चलने लगते हैं। कस्बे के लोग इन्हें अपशकुन मानने लगते हैं, जबकि दर्शकों के लिए यही जोड़ी फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बन जाती है।
इसी उथल-पुथल भरे सफर में मीनू टैक्सी (शालिनी पांडे) की एंट्री कहानी को भावनात्मक संतुलन देती है। दूसरी ओर अजीब मिज़ाज का अपराधी मोर्देखाई (चंकी पांडे) और नियमों में उलझा पुलिस अफसर दीपक शर्मा (अमित सियाल) हालात को और पेचीदा बना देते हैं। बंसी (सुमित गुलाटी) जैसे किरदार इस पूरी अफरातफरी में अतिरिक्त रंग भरते हैं।
अभिनय
वरुण शर्मा राहु के किरदार में अपनी कॉमिक स्ट्रेंथ को पूरी तरह भुनाते हैं। उनके एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज हर सीन में हंसी निकाल लेते हैं। पुलकित सम्राट केतु के रूप में सहज और नैचुरल लगते हैं, और दोनों की आपसी केमिस्ट्री फिल्म की रीढ़ बन जाती है। कई दृश्य ऐसे हैं, जो सिर्फ इस जोड़ी की वजह से याद रह जाते हैं।
शालिनी पांडे मीनू टैक्सी के रोल में सादगी और ताजगी दोनों लाती हैं। पियूष मिश्रा फूफा के किरदार में रहस्य और हास्य का संतुलन बनाए रखते हैं। चंकी पांडे का मोर्देखाई अजीब, डरावना और मज़ेदार-तीनों का मिश्रण है। अमित सियाल, मनु ऋषि चड्ढा और सुमित गुलाटी सपोर्टिंग रोल्स में फिल्म की गति को थामे रखते हैं।
निर्देशन
निर्देशक विपुल विज की फिल्म में कॉन्फिडेंस साफ झलकता है। कॉमेडी कहीं भी बनावटी नहीं लगती, बल्कि हालात से स्वाभाविक रूप से निकलती है। हालांकि कुछ हिस्सों में फिल्म थोड़ी खिंचती हुई महसूस होती है, लेकिन दिलचस्प किरदार उस कमी को ढक लेते हैं।
हिमाचल की खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को फ्रेश लुक देती हैं और बैकग्राउंड म्यूज़िक कहानी के टोन के साथ ठीक से बैठता है।
क्यों देखें
'राहु केतु' उन दर्शकों के लिए है जो थिएटर में जाकर सिर्फ हंसना और रिलैक्स करना चाहते हैं। पुलकित सम्राट-वरुण शर्मा की जोड़ी, रंगीन कैरेक्टर्स और हल्की-फुल्की जादुई कहानी इसे एक मज़ेदार थिएटर एक्सपीरियंस बनाती है। अगर आप लॉजिक से ज़्यादा लाफ्टर को तरजीह देते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जा सकती है। कुल मिलाकर फ़िल्म राहु केतु हिमाचल की खूबसूरत लोकेशन पर एक मैजिकल माइथो सब्जेक्ट पर लाफ्टर परफ़्रोमंस का नॉन स्टॉप एंटरटेनमेंट है।












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