वरुण पर रासुका सही फैसला
राख के ढेर में चिंगारी की खोज
पता नहीं आडवाणी साहब ने या फिर संघ परिवार ने वरुण को यह समझा दिया कि मुसलमानों को गालियां देकर और जय श्रीराम का नारा लगाकर मतों का ध्रुवीकरण करके चुनाव जीता जा सकता है। या फिर वरुण को लगा हो कि वे अपने चचेरे भाई राहुल गांधी से पिछड़ रहे हैं, इसलिए साम्प्रदायिक कार्ड चला हो। कारण कुछ भी रहा हो, लेकिन अब तक संघ परिवार की समझ में शायद यह नहीं आया है कि राम मंदिर का मुद्दा राख के ढेर में कब का तब्दील हो चुका है। वरुण उसी राख के ढेर में चिन्गारी ढूंढने की कोशिश में वह सब कुछ कह गए, जिसने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
बहुत लोगों की राय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वरुण कों गिरफ्तार करके और फिर रासुका तामील करके उन्हें हीरो बना दिया है। कोई हीरो न बन जाए, महज इसी बात को लेकर कानून का पालन न करने की बात बेमानी है। यदि वरुण को खुला छोड़ दिया जाता तो उनका हौसला और बढ़ता, जो प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक हो सकता था। वरुण गांधी की गिरफ्तारी के समय पूरा उत्तर प्रदेश शांत रहा। सिर्फ पीलीभीत के कुछ लड़के हाय तौबा मचाकर चुप हो गए। अब इतना तो होगा ही कि जो लोग साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाकर चुनाव की वैतरणी पार करने सोच रहे है, कुछ भी अनाप-शनाप बोलने से पहले दस बार सोचेंगे।
कुरैशी को क्यों छोड़ा?
उत्तेजक बातें करके सस्ती लोकप्रियता पाने का तरीका नया नहीं है। उत्तर प्रदेश के ही एक मंत्री याकूब कुरैशी ने डेनमार्क के उस कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने की एवज में 51 करोड़ रुपये देने का ऐलान कर दिया था, जिसने हजरत मौहम्मद साहब के कार्ट्रून की एक श्रंखला बनायी थी। आजकल याकूब कुरैशी हाशिए पर हैं। सच यह है कि याकूब कुरैशी को भी तब कानून का सजा देनी चाहिए थी। यदि ऐसा हो जाता तो वरुण की इतनी हिम्मत नहीं होती।
आज मायवती वरुण पर कानून का डंडा चला रही हैं, लेकिन उन्होंने भी महात्मा गांधी और हिन्दुओं की उच्च जातियों प्रति विष वमन करके अपना वोट बैंक पक्का किया है। कानून को मजाक समझने वाले नेताओं पर जब तक कठोर कार्यवाही नहीं होगी तब तक साम्प्रदायिक विद्वेष फैलाने वाले बयानों पर अंकुश लगाना संभव नहीं है।
सांप्रदायिक राजनीति की सीमा
वरुण क्या यह नहीं जानते कि विनय कटियार, उमा भारती, प्रवीण तोगड़िया, साध्वी रितम्भरा और अशोक सिंहल जैसे लोग अब किनारे लगा दिए गए हैं। एक जमाना था, जब इन लोगों की नफरत भरी बातों से पूरे उत्त्र प्रदेश में आग लग जाती थी। इनकी सभाओं में लाखों की भीड़ जुटती थी। अब ये पुराने दिनों का याद करके सिर्फ आहें भरते हैं। इनकी सभाओं में सौ-पचास से अधिक लोग भी नहीं जुटते। कल्याण सिंह जैसे हिन्दुत्व के पुरोधा भी अब भाजपा को दफनाने का लक्ष्य लेकर समाजवादी के साथ हो गए हैं। आडवाणी तो पाकिस्तान में जाकर उन जिनाह की मजार पर जाकर उन्हें धर्मरिपेक्ष व्यक्ति का खिताब दे आए, जिन्हें कोसते-कोसते आडवाणी साहब ने अपनी उम्र गुजार दी। आडवाणी साहब भी यह समझ चुके हैं कि साम्प्रदायिक राजनीति की एक सीमा है।
यह बात मायावती की समझ में भी आ गयी है कि केवल दलितों के सहारे लम्बे समय तक राजनीति नहीं की जा सकती। इसलिए वे भी अब सर्वसमाज की बात करने लगीं हैं। यह बात वरुण को भी यह बात समझ लेनी चाहिए कि साम्प्रदायिक राजनीति शॉर्टकट रास्ता तो है, लेकिन उससे राजनीति की लम्बी पारी नहीं खेली जा सकती।
इनसान की कीमत ज्यादा या जानवर की
मेनका पशु और पक्षियों की बहुत हमदर्द हैं। मेरठ में उन कुत्तों का बहुत आतंक बरपा है, जो पागल हो गए हैं। दो-तीन बच्चे इन कुत्तों के शिकार हो गए। शहर में लगभग पचास कुत्तों को मार गिराया गया। मेनका की संस्था पीपुल्स फार एनिमल के स्थानीय पदाधिकारियों ने मेनका गांधी को मेरठ में कुत्तों को बेदर्दी से मारे जाने की सूचना दी। मेनका ने कुत्तों पर होने वाली ज्यादतियों के खिलाफ बयान जारी किए।
उम्मीद थी कि पुश-पक्षियों के मामले में संवेदनशील मेनका अपने बेटे के बचाव में न आकर बेटे को संयम बरतने की सलाह देंगी। लेकिन मेनका न सिर्फ बेटे के बचाव में आगे आयीं बल्कि बेटे का समर्थन किया। जानवरों को न मारने की बात करने वाली मेनका इन्सानों के हाथ काट लेने की बात का कैसे समर्थन कर सकती हैं ? क्या उनकी नजर में इंसान की कीमत जानवरों से भी कम है?
-
जानिए कौन हैं भाजपा नेता अजेंद्र अजय, सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हड़कंप, संन्यास के विकल्प की क्या बताई वजह -
कोर्ट से राहत के बाद अरविंद केजरीवाल ने परिवार संग हरिमंदिर साहिब में टेका मत्था, CM भगवंत मान भी रहे साथ -
Nishant Kumar: नीतीश कुमार की विरासत संभालने को तैयार निशांत, नालंदा में पहली बार खुलकर बोले सीएम के बेटे -
LPG ग्राहकों के लिए अलर्ट! सरकार का नया फरमान, तुरंत करें ये काम नहीं तो कट सकता है गैस कनेक्शन -
Balen Shah Caste: पिता मधेशी, मां पहाड़ी, आखिर किस जाति से हैं बालेन शाह? इंटरनेट पर क्यों छिड़ी बहस -
वर्ल्ड कप जीत के बाद ट्रेन से घर पहुंचा भारतीय क्रिकेटर, टिकट चेक में लगभग पकड़ा गया, बीवी ने झूठ बोल बचाया -
Rahul Gandhi Wedding Visit: कौन है दुल्हन तनु, जिसकी शादी में पहुंचे राहुल गांधी? तोहफे में क्या-क्या दिया? -
मजहब की दीवार टूटी और उम्र का फासला भी मिटा, शिवम दुबे से इतने साल बड़ी हैं पत्नी अंजुम, चौंका देगी यह जानकारी -
Weather Delhi-NCR: दिल्ली में अगले 24 घंटे में मौसम लेगा खतरनाक यू-टर्न! IMD के नए अलर्ट ने बढ़ाई टेंशन -
PNG Gas Crisis: घर में सिलेंडर नहीं, पाइप वाली गैस PNG चलती है? दिल्ली-NCR के लोगों के लिए आई बड़ी चेतावनी -
'वो गुस्से में था और मैंने माफ़ी मांगी, टी20 विश्व कप के बाद सूर्यकुमार यादव का सनसनीखेज खुलासा -
'ये लव जिहाद है, मैनेजर ने कर दिया सौदा', कुंभ मेले वाली मोनालिसा ने की शादी, डॉयरेक्टर का सनसनीखेज खुलासा













Click it and Unblock the Notifications