चुनाव प्रचार? मीडिया से बेहतर कौन!
पिछले कुछ दिनों से आपने गौर किया होगा कि कोई नौसीखिया राजनेता शिगुफा छोड़ देता हैं...(माफ कीजिएगा मैं संजय दत्त की बात नहीं कर रहा) और मीडिया मूर्खों की तरह उनके पीछे पड़ जाता है और फिर वो मीडिया को अपना भोंपू समझ कर चुनाव प्रचार करते हैं।
एक कप चाय दालमोठ के साथ खिला कर नेशनल प्रचार में जुटे हैं हमारे राजनेता। लेकिन मीडिया के लोगों को ये बात समझ नहीं आ रही वो तो बस प्रेस कांफ्रेंस तब तक दिखाते रहेंगे जब तक प्रेस कांफ्रेंस में लालू के गवई अंदाज में कोई नेताजी ये न कह दें "ए रिपोर्टर चाय नाश्ता का इंतजाम है खा पीकर जाना"..
चलो ये भी समझ में आता है कि टीवी पत्रकारों को तो नाली,सड़क की खबरें नहीं दिखती वो तो अब इस तरह की व्यवस्था के आदी हो गए हैं सो "रियेलिटी शो" चुनाव में कोई कुछ भी बोल रहा है तो उसे 21 इंच पर दिखाते रहेंगे पर पता नहीं चुनाव आयोग को क्या हो गया है, जो इन नेताओं को निर्देश जारी नहीं कर रहा...
आज ही बीजेपी ने घोषणा पत्र जारी किया लगभग सभी चैनलों ने इस पर आधे घंटे तक दिखाया। समझना मुश्किल है कि क्या ये उस प्रचार का ही हिस्सा है, जो चैनलों पर आज कल पार्टियां दे रही हैं या फिर समाचार का हिस्सा...
खैर हमें क्या हमें तो बस चुनाव आयोग से आस है।













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