Subhash Chandra Bose: 'नेता जी' ने ICS परीक्षा में पाया था चौथा स्थान, फिर क्यों उन्होंने नहीं की नौकरी?
Subhash Chandra Bose: आज, 23 जनवरी, पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मना रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक का जीवन देशभक्ति, साहस और आत्मबलिदान की अद्भुत कहानी है। सुभाष चंद्र बोस ने न केवल आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी, बल्कि देशवासियों को अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा भी दी। उनका नारा, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा," आज भी हर भारतीय के दिल में देशप्रेम की भावना जगाता है।
नेताजी ने अपनी प्रतिभा और लगन से भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास की, लेकिन अंग्रेजों की नौकरी छोड़कर देश की आजादी के लिए संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने 'आजाद हिंद फौज' की स्थापना की और ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांति का आह्वान किया। उनकी दूरदर्शिता, नेतृत्व क्षमता और निडरता ने उन्हें इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया।

सुभाष चंद्र बोस की जयंती केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और बलिदानों को याद कर प्रेरणा लेने का मौका है। बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता थे। उनका जीवन संघर्ष, बलिदान और दृढ़ निश्चय की मिसाल है। सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय सिविल सर्विसेज (ICS) की परीक्षा पास कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। साल 1919 में उन्होंने इस परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया था।
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इंग्लैंड में सिविल सर्विसेज की तैयारी
सुभाष चंद्र बोस ने ICS परीक्षा की तैयारी इंग्लैंड में की। उस समय यह परीक्षा भारतीयों के लिए बहुत कठिन मानी जाती थी। सुभाष ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और कड़ी मेहनत से इस परीक्षा में सफलता पाई।
ICS परीक्षा में उनकी उपलब्धि
सुभाष चंद्र बोस ने 1919 में भारतीय सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी और चौथे स्थान पर आए। उन्हें 6000 में से 2281 अंक मिले थे। उन्होंने इतिहास विषय चुना था और अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया।
परीक्षा के टॉपर कौन थे?
इस परीक्षा में पी.रामालिंगम नाम के व्यक्ति ने टॉप किया था। उन्हें 6000 में से 2716 अंक मिले थे। उनके सबसे ज्यादा अंक इतिहास, पॉलिटिकल इकॉनमी और अंग्रेजी में आए थे।
सुभाष चंद्र बोस का बलिदान
हालांकि, सुभाष चंद्र बोस ने ICS की नौकरी स्वीकार नहीं की। उनका मानना था कि उनकी जगह देश की सेवा में होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष शुरू किया।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
सुभाष चंद्र बोस ने 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की स्थापना की। उनकी सेना ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। बोस का जीवन देशभक्ति, त्याग और निडरता का प्रतीक है। सुभाष चंद्र बोस ने हमें यह सिखाया कि अपने देश की आजादी के लिए किसी भी त्याग से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनकी प्रेरणादायक कहानी आज भी हमें प्रेरित करती है।
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