शिक्षा मंत्रालय की सर्वे में खुल गई स्कूलों की पोल, क्लास 3 के 45% बच्चे नहीं कर पाते 100 तक गिनती
PARAKH Survey: देश की लाखों स्कूली किताबों में लिखे ज्ञान और असल जमीनी सच्चाई में काफी फर्क है। इसका खुलासा हाल ही में हुए शिक्षा मंत्रालय के एक बड़े सर्वे 'परख' में हुआ है। जो बच्चे स्कूलों में तीसरी, छठी या नौवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, उनके पास कितनी बुनियादी समझ है ये सवाल अब चिंता का विषय बन गए हैं।
सर्वे में सामने आया कि कक्षा 3 के लगभग आधे बच्चे ऐसे हैं जिन्हें 10 तक का पहाड़ा तक नहीं आता। यह स्थिति तब और गंभीर लगती है जब यह सर्वे देश के 74,000 से ज्यादा स्कूलों, 21 लाख छात्रों और हजारों शिक्षकों से बातचीत कर तैयार किया गया हो। सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि उस भविष्य का है, जो कल इन बच्चों के हाथों में होगा।

गिनती और पहाड़े में कमजोर निकले तीसरी कक्षा के बच्चे
शिक्षा मंत्रालय द्वारा कराए गए हालिया सर्वे 'परख', पहले जिसे राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे यानी NAS कहा जाता था में बच्चों की पढ़ाई को लेकर ये चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 3 के करीब 47% बच्चों को 10 तक के पहाड़े तक नहीं आते, और सिर्फ 55% बच्चे ही 99 तक की गिनती सही क्रम में बोल पाते हैं।
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देशभर के 21 लाख से ज्यादा छात्रों पर हुई स्टडी
यह सर्वे 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 781 जिलों में स्थित 74,000 से अधिक स्कूलों में किया गया। इसमें कक्षा 3, 6 और 9 के लगभग 21 लाख छात्र, 2.7 लाख शिक्षक और स्कूल प्रशासन शामिल हुए।
गणित बनी सबसे बड़ी चुनौती
कक्षा 3 के बच्चों में बुनियादी गणित को लेकर खासी कमी पाई गई। सिर्फ 58% छात्र दो अंकों का जोड़ और घटाव ठीक से कर पाए। वहीं, कक्षा 6 में हालात और भी कमजोर दिखे-छात्रों को गणित में औसतन केवल 46% अंक मिले। इसी क्लास में भाषा विषय में 57% और सामाजिक-पर्यावरणीय विषय (हमारे आसपास की दुनिया) में 49% अंक आए।
कक्षा 9 में केंद्र सरकार के स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर
रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि केंद्र सरकार के स्कूलों के छात्र, खासकर कक्षा 9 के, भाषा जैसे विषयों में सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। निजी स्कूलों के बच्चों ने विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में तो ठीक-ठाक अंक हासिल किए, लेकिन गणित में पिछड़ गए। राज्य सरकार और सहायता प्राप्त स्कूलों का प्रदर्शन औसत पाया गया।
ग्रामीण बच्चों ने कक्षा 3 में मारी बाजी, आगे पिछड़ गए
दिलचस्प बात यह रही कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों ने कक्षा 3 में शहरी छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन जैसे-जैसे कक्षा आगे बढ़ी, शहरी बच्चे आगे निकल गए, खासकर कक्षा 6 और 9 में।
अब क्या करेगी सरकार?
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया कि इस सर्वे के नतीजों को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसके आधार पर सीखने की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति तैयार की जा रही है, जिसमें कमजोर वर्गों और विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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