JEE Success Story: एक जैसी शक्ल और अब एक जैसा स्कोर! जुड़वां भाइयों के 285-285 अंक देख हर कोई हैरान
JEE Success Story Mahroof Ahmad Khan-Masoor Ahmad Khan: देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 के परिणाम घोषित होते ही ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के दो भाइयों की कहानी सोशल मीडिया पर छा गई है। महरूफ अहमद खान और मसूर अहमद खान नामक इन जुड़वां भाइयों ने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि 300 में से बिल्कुल समान 285-285 अंक हासिल कर सबको हैरान कर दिया है।
बचपन से एक ही स्कूल और एक ही बेंच पर बैठकर पढ़ने वाले इन भाइयों की सफलता के पीछे उनकी मां का अटूट समर्पण छिपा है। इनकी मां ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपनी सरकारी डॉक्टरी की नौकरी तक दांव पर लगा दी। तीन साल तक कोटा की तंग गलियों में मेहनत करने वाले इन भाइयों ने साबित कर दिया कि अटूट संकल्प और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

JEE Success Story: समान अंक और बचपन का साथ
महरुफ और मसूर की शैक्षणिक यात्रा हमेशा से ही शानदार रही है। कक्षा 10वीं में महरूफ ने 95.2% और मसूर ने 97.2% अंक प्राप्त किए थे, जिसके बाद दोनों ने इंजीनियर बनने की ठान ली थी। ताज्जुब की बात यह है कि JEE Main सेशन-1 में भी दोनों के अंक एक जैसे रहे, जो उनकी एक जैसी सोच और तैयारी का प्रमाण है।
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JEE Success Story: कोटा में तपस्या, मां का बड़ा बलिदान
इन भाइयों की सफलता की पटकथा राजस्थान के कोटा में लिखी गई। करीब तीन साल पहले जब वे तैयारी के लिए कोटा आए, तो उनकी मां डॉ. जीनत बेगम, जो पेशे से एक गायनाकोलॉजिस्ट हैं, ने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। वे अपने बेटों के साथ कोटा में रहकर उनकी पढ़ाई और खान-पान का ख्याल रखती रहीं। परिवार का मानना है कि मां के इस त्याग ने ही दोनों को कठिन समय में टूटने नहीं दिया।
JEE Success Story: तैयारी की खास रणनीति
दोनों भाइयों ने अपनी सफलता के कुछ प्रमुख मंत्र शेयर किए हैं। उन्होंने NCERT की किताबों को अपना आधार बनाया। दोनों भाई रोज एक साथ पढ़ते थे और एक-दूसरे के 'डाउट सॉल्वर' बनते थे। भाइयों के बीच हल्की-फुल्की प्रतिस्पर्धा रहती थी, जिसने उन्हें निरंतर सुधार करने के लिए प्रेरित किया। जब कभी मॉक टेस्ट में अंक कम आते, तो वे शिक्षकों की मदद से अपनी कमजोरियों को दूर करते थे।
सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं, ओलंपियाड के भी किंग
इन जुड़वां भाइयों की प्रतिभा केवल JEE तक सीमित नहीं है। महरूफ और मसूर ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में हिस्सा लेकर अब तक कुल 30 गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं। यह उनकी गहरी वैचारिक समझ और विषय पर पकड़ का सबसे बड़ा प्रमाण है।
अगला लक्ष्य, IIT बॉम्बे और कंप्यूटर साइंस
JEE Main में परचम लहराने के बाद अब इन दोनों का लक्ष्य JEE Advanced को क्रैक करना है। दोनों भाइयों का सपना देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करना है। उनकी मेहनत और अब तक के रिकॉर्ड को देखकर यह लक्ष्य दूर नहीं लगता।
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