शुभ भी है, अशुभ भी है पंचग्रही योग, जानिए विस्तार से

By: पं. गजेंद्र शुक्ल
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नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में अक्सर पंचग्रही योग का नाम सुनने को मिलता है। कई जातकों की कुंडली में पंचग्रही योग होता है और ज्योतिषकर्ता उन्हें बताते हैं कि आपकी कुंडली में पंचग्रही योग है तो आपके साथ ऐसा होगा, वैसा होगा। आइये जानते हैं यह पंचग्रही योग होता क्या है और इसका जातक के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह योग किनके लिए शुभ होता है और किनके लिए अशुभ।

पंचग्रही योग कुंडली में हो तो व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है और उसे जीवन में क्या-क्या मिलने वाला है, यह सब हम जानते हैं:-

जैसा कि नाम से ही जाहिर है पंचग्रही का अर्थ है पांच ग्रह। यानी जब किसी व्यक्ति के जन्मांगचक्र में किसी भी भाव में पांच ग्रह एक साथ बैठे हों तो पंचग्रही योग का निर्माण होता है। जरूरी नहीं कि यह योग सभी के लिए बुरा हो, पंचग्रही योग शुभ भी होता है और इसका शुभ-अशुभ होना ग्रहों की युति पर निर्भर करता है। यदि पांच में शुभ ग्रहों की संख्या अधिक हो तो इस योग वाला व्यक्ति अपने जीवन में सर्वश्रेष्ठ समय व्यतीत करता है और यदि अशुभ ग्रहों की संख्या अधिक हो तो इसका विपरीत प्रभाव देखने को मिलता है।

 कौन से ग्रहों की युति का क्या प्रभाव

कौन से ग्रहों की युति का क्या प्रभाव

रवि-चंद्र-मंगल-बुध-गुरु: यदि जन्मकुंडली के किसी भी स्थान में ये पांच ग्रह एक साथ बैठे हों तो व्यक्ति युद्ध कौशल में माहिर होने के साथ ढोंग-ढकोसले वाला होता है।

रवि-चंद्र-मंगल-बुध-शुक्र

रवि-चंद्र-मंगल-बुध-शुक्र

ये पांच ग्रह एक साथ बैठे हों तो व्यक्ति अत्यंत स्वार्थी किस्म का होता है। वह केवल अपना ही अपना सोचता है और उसकी निगाह में दूसरों की कोइ अहमियत नहीं होती। ऐसे व्यक्ति के पास शक्ति का अभाव होता है और भाई-बंधुओं से सदा दूर रहता है।

पांच ग्रहों का एक साथ होना

पांच ग्रहों का एक साथ होना

रवि-चंद्र-मंगल-बुध-शनि: इन पांच ग्रहों का एक साथ होना व्यक्ति को अल्पायु बनाता है। इस व्यक्ति को जीवनसाथी और संतानों का सुख नसीब नहीं होता। परिजन साथ छोड़ जाते हैं और समस्त सुखों से वंचित रहता है। जीवनपर्यन्त धन के अभाव से जूझता रहता है।

रवि-चंद्र-बुध-गुरु-शुक्र: ये ग्रहों की युति होने पर व्यक्ति अपना और अपने परिवार का धन नष्ट कर देता है। दूसरों के धन पर नजर बनी रहती है। नेत्र और अनेक रोगों से पीडि़त होता है। छल-कपट करके पराए स्त्री-पुरुषों पर नजर गड़ाए रहता है।

 धन संपदा ये युक्त, अत्यंत प्रतिष्ठित

धन संपदा ये युक्त, अत्यंत प्रतिष्ठित

  • रवि-चंद्र-मंगल-शुक्र-शनि: इन पांच ग्रहों की युति में व्यक्ति महापराक्रमी, धन संपदा ये युक्त, अत्यंत प्रतिष्ठित और मान-सम्मान प्राप्त होता है। ऐसा व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व का धनी और बड़ा व्यापारी होता है।
  • रवि-चंद्र-बुध-शुक्र-शनि: ये ग्रह साथ हों तो व्यक्ति के पास धन तो खूब होता है, लेकिन परस्त्री पर नजर लगी रहती है। स्त्री है तो वह परपुरुषों से संबंध स्थापित करने में तनिक भी संकोच नहीं करती। एक समय के बाद ये अपने पाप कर्मों की वजह से अपना कमाया धन ही नष्ट कर देते हैं।

ग्रहों की युति के कई तालमेल

ग्रहों की युति के कई तालमेल

इनके अलावा भी इन ग्रहों की युति के कई तालमेल बनते हैं। इसके अलावा व्यक्ति के जन्म का समय, लग्न स्थान आदि का भी अध्ययन जरूरी होता है। इसलिए यदि आपकी कुंडली में पंचग्रही योग बना हुआ है तो किसी योग्य ज्योतिषी को दिखाकर सटीक भविष्य ज्ञात किया जा सकता है।

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English summary
Panch Mahapurusha yoga is formed when any one of the five Tara-grahas or non-luminary planets are at the time of birth situated in their own sign or in their exaltation sign in a kendra from the Lagna.
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