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Surya Gochar 2025: सूर्य का मृगशिरा में गोचर, अब होगी झमाझम बारिश, जानिए किन लोगों की चमकेगी किस्मत?

Surya Gochar 2025: सूर्य मंगल के नक्षत्र मृगशिरा में 8 जून को प्रात: 7 बजकर 18 मिनट से प्रवेश कर गया है, सूर्य 22 जून तक इसी नक्षत्र में रहेगा। यह वर्षाकाल होता है और सूर्य जब मृगशिरा नक्षत्र में होता है तो वर्षा कम या मध्यम होती है। इसलिए 22 जून तक बहुत कम या मध्यम स्तर की वर्षा होगी क्योंकि यह मंगल का नक्षत्र है। सूर्य 22 जून को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेगा, उस समय तेज वर्षा का दौर शुरू होगा।

नक्षत्रों की सूची में मृगशिरा पांचवां नक्षत्र है और इस नक्षत्र का विस्तार वृषभ और मिथुन राशि तक होता है तथा इसका स्वामी ग्रह मंगल है। यह नक्षत्र चंचलता, जिज्ञासा, साहस, यात्रा और ज्ञान से जुड़ा होता है। सूर्य जब इस नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब उसमें मंगल की ऊर्जा का संचार होता है, जिससे उसकी प्रकृति में तेजस्विता, संघर्षशीलता और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है।

Surya Gochar 2025

सूर्य के मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश की अवधि में लोगों में मानसिक सक्रियता, यात्रा की प्रवृत्ति और नई जानकारियों के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और लेखकों के लिए यह समय अनुकूल है। इस समय ये अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करके नए काम प्रारंभ कर सकते हैं।

स्थायित्व की बजाय परिवर्तन की ओर झुकाव

मृगशिरा नक्षत्र की चंचल प्रकृति के कारण व्यक्ति स्थायित्व की बजाय परिवर्तन की ओर झुकता है। इसलिए यह काल नए कार्यों की शुरुआत, शोधकार्य या व्यावसायिक विस्तार के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्य पूरी क्षमता से आगे बढ़ते हैं और उनमें विस्तार होता जाता है।

देवगणों का नक्षत्र है मृगशिरा (Surya Gochar 2025)

वैदिक दृष्टि से मृगशिरा नक्षत्र को \"देवगण\" का नक्षत्र माना गया है, जो उच्च आदर्शों और सत्कर्मों की प्रेरणा देता है। सूर्य जब इस नक्षत्र में होता है, तो आत्मा की चेतना जागृत होती है और व्यक्ति में धार्मिकता, करुणा और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। यह समय आत्ममंथन, ध्यान और ईश्वर के साक्षात्कार के लिए भी उपयुक्त माना गया है।

कृषि के लिए महत्वपूर्ण (Surya Gochar 2025)

कृषि के क्षेत्र में मृगशिरा नक्षत्र का विशेष महत्व है। सूर्य के मृगशिरा में आने के साथ ही वर्षा ऋतु की आहट सुनाई देने लगती है और किसान खेतों की तैयारी प्रारंभ करते हैं। प्राचीन भारतीय पंचांगों में इसे 'खरीफ फसलों' की तैयारी का प्रारंभिक चरण माना गया है।

क्या सावधानी रखें

मृगशिरा का स्वामी मंगल है, इसलिए इस समय अधिकांश लोगों में क्रोध, आवेग और विवाद की आशंकाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में संयम, विवेक और संवाद की भाषा पर नियंत्रण आवश्यक होता है। अपने व्यवहार और आचरण में सुधार करना आवश्यक होगा। किसी को कोई ऐसी बात न बोलें जिससे विवादित स्थिति बने।

क्या करें

सूर्य के मृगशिरा नक्षत्र में गायत्री मंत्र का जाप सबसे उत्तम होता है। गायत्री मंत्र का मानसिक जाप करें या गायत्री मंत्र की नियमित रूप से 15 मिनट रिकार्डिंग सुनें। इससे मंगल और सूर्य दोनों की शांति होगी और आपको मानसिक शांति भी प्राप्त होगी।

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