Surya Grahan Sutak Timings: सूर्य ग्रहण कब से कब तक? क्या लगा है सूतक काल? जानिए कुछ खास बातें

Surya Grahan 2024 Kab se Kab Tak Hai : साल का पहला सूर्य ग्रहण आज 9 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा और मध्य रात्रि 2 बजकर 23 मिनट पर खत्म होगा लेकिन भारत में ये प्रभावी नहीं है और इसी वजह से ना तो इसका सूतक काल लगा है और ना ही पूजा पाठ पर कोई असर पड़ा है।

Surya Grahan 2024

आपको बता दें कि वैदिक धर्म में ग्रहण अच्छा नहीं माना जाता है और इसी वजह से इसके शुरू होने से पहले सूतक लग जाता है, जिसमें पूजा-पाठ से लेकर सारे मांगलिक काम बंद होते हैं।

सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले लगता है लेकिन आज ये नहीं लगा है और इसी कारण आज सोमवती अमावस्या के दिन कोई भी धार्मिक अनुष्ठान बंद नहीं है और लोग बिना किसी शंका और भय से पूजा-पाठ कर रहे हैं।

सोमवती अमावस्या पर भक्तों ने किया दान-पुण्य

मालूम हो कि सोमवती अमावस्या पर भक्तगणों ने सोमवार सुबह पवित्र नदियों में स्नान किया और दान पुण्य किया। माना जाता है कि अमावस्या के दिन ऐसा करने से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सोमवार के दिन अमावस्या आने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या का नाम दिया गया है। खास बात ये है कि सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन ही पड़ता है।

सूर्यदेव की विशेष आरती करें ( Surya Dev Aarti)

आज के दिन सूर्यदेव की विशेष आरती करनी चाहिए, ऐसा करने से इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है और उसे हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है। वैसे भी सूर्यदेव शक्ति, ऊर्जा और यश के प्रतीक हैं, इनकी पूजा करने से इंसान के अंदर ये तीन विशेषताएं भी आती हैं।

सूर्यदेव की आरती (Surya Dev Aarti Lyrics In Hindi)

  • ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
  • जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
  • धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
  • अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
  • फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
  • गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
  • स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
  • प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
  • वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
  • ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
  • ।।ॐ जय सूर्य भगवान...।।
  • ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
  • जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
  • धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
  • जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
  • रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता।
  • षटपद मन मुदकारी, हे दिनमणि दाता॥
  • जग के हे रविदेव, जय जय जय रविदेव।
  • जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
  • नभमंडल के वासी, ज्योति प्रकाशक देवा।
  • निज जन हित सुखरासी, तेरी हम सबें सेवा॥
  • करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव।
  • जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥
  • कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी।
  • निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी॥
  • हे सुरवर रविदेव, जय जय जय रविदेव।
  • जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव॥

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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