Surya Grahan 2021: सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद जरूर करें ये काम, दूर हो जाएगा हर कष्ट
नई दिल्ली, 04 दिसंबर। साल 2021 का अंतिम 'सूर्य ग्रहण' आज है। हालांकि ये ग्रहण में भारत में नजर नहीं आने वाला है और इस कारण प्रभावी नहीं है लेकिन ग्रहण का असर व्यक्ति के ग्रहों पर पड़ता है और इस कारण ग्रहण काल और ग्रहण के बाद कुछ चीजों का ध्यान रखना बहुत ज्यादा जरूरी है। मालूम हो कि ग्रहण आज सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर बाद 03:07 बजे समाप्त होगा।

ग्रहण के बाद जरूर करें ये काम
- ग्रहण के खत्म होने पर सबसे पहले खुद स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
- पूरे घर को गंगाजल से स्वच्छ करें।
- देवताओं की मूर्तियों पर भी गंगाजल छिड़कें।
- घर के मंदिर में घी का दीपक और पूरे घर में घूप बत्ती जलाएं।
- इससे घर का वातावरण शुद्द हो जाता है और अशुद्ध हवाएं बाहर चली जाती हैं।
- तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं।
- घर में खाने पीने की चीजों में तुलसी की पत्ती डाल देनी चाहिए।
- जरूरतमंदों को भोदन कराएं और दान करें।
- ईश्वर का ध्यान करें, हो सके तो भजन-कीर्तन करें।
- गणेश जी की विशेष पूजा करें क्योंकि वो विघ्नहर्त हैं जो कि ग्रहण के दौरान हुई सभी गलत चीजों का नाश कर देते हैं।
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इन मंत्रों से करें गणपति की पूजा
- "ॐ गं गणपतये नमः
- "वक्रतुण्डाय हुं"
- "ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।"
- "ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा"
- ''ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा''

इन मंत्रों से करें मां तुलसी की पूजा
- महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी,
- आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
- तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
- धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनः प्रिया।।
- लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
- तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

सूर्य की पूजा
हिंदू धर्म में सूर्य भगवान की पूजा की जाती है, इनकी पूजा करने से इंसान को यश और वैभव की प्राप्ति होती है। इनके 12 नाम हैं, जिनका नाम लेकर अर्ध्य देने से इंसान के सारे कष्टों का अंत होता है। इसलिए सूर्य ग्रहण के बाद विशेष मंत्रों से सूर्यदेव की भी पूजा करनी चाहिए।
- ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
- ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
- ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।
- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।
- ॐ सूर्याय नम: ।
- ॐ घृणि सूर्याय नम:












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