जानिए छींक आने के शुभ और अशुभ फल
लखनऊ। शरीर की लगभग हर अनैच्छिक क्रिया स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होती है। अनैच्छिक क्रिया पर आपका कोई जोर नहीं होता है, वह स्वतः ही होती है। जैसे-छींक का आना यह एक अनैच्छिक क्रिया है, जिससे नासिका के द्वारा की सफाई होती है और दिमाग में सकारात्मक उर्जा का प्रवेश होता है।

शास्त्रों में छींक आना एक अपशकुन भी माना गया है। वैसे तो छींक प्रायः सब दिशाओं की खराब मानी जाती है किन्तु कुछ स्थानों की छींक शुभ फलदायक भी होती है।
आपने स्वयं छींक दिया तो उसका फल महा अशुभ
यदि आप कहीं जा रहें है और आपने स्वयं छींक दिया तो उसका फल महा अशुभ होता है और जिस काम से जा रहें उसमें बाधायें आयेंगी। अगर लगातार दो छींके आ गई तो दोष समाप्त हो जाता है। छींक आने के बाद भी अगर जाना आवश्यक है तो थोड़ी मिश्री खाकर दों घॅूट जल पीकर ही निकले।

- गाय की छींक मरण तुल्य होती है।
- बायीं ओर या पीछे की ओर छींक हो तो दोषकारक नहीं है।
- यदि सम्मुख छींक हो तो वह लड़ाई करवाती है।
- आपके दाहिने छींक हो तो धन का नाश कराती है।
- जो छींक उॅची होती है वह प्रतिष्ठा व सम्मान दिलाती है।
- नींचे की ओर होने वाली छींक भय उत्पन्न कराती है। 8-कन्या, विधवा, मालिन, धोबिन, रजस्वला, वेश्या आदि की छींक विशेष अशुभ मानी गई है।
- आसन, शयन, शौच, दान, भोजन, औषधि सेवा, विद्यारम्भ और बीज बोने के समय, युद्ध या विवाह में जाते समय छींक आये तो शुभ फलदायक होती है।
- शराबी की छींक, बच्चों की छींक, बूढ़ों की छींक तथा हठ पूर्वक छींकना निष्फल माना जाता है।
- कोशिश करने पर भी यदि छींक न रूके तो मनुष्य जिस कार्य के लिए जा रहा हो, उसमें विघ्न अवश्य पड़ता है।













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