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देश में अनेक स्थानों पर होती है कालसर्प दोष की शांति

नई दिल्ली, 27 जनवरी। जन्मकुंडली में जब राहु और केतु के मध्य में अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष बनता है। जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसके जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट आते रहते हैं। आर्थिक, शारीरिक और पारिवारिक दृष्टि से व्यक्ति का जीवन कष्टमय रहता है। उसे आजीविका के साधन प्राप्त करने में कठिनाई आती है। विवाह होने में पहले तो विलंब होता है और विवाह हो जाए तो वैवाहिक जीवन कष्टमय होता है। इसलिए इस दोष की शांति करवाना अत्यंत आवश्यक होता है।

देश में अनेक स्थानों पर होती है कालसर्प दोष की शांति

कालसर्प दोष की शांति के प्रमुख स्थान नासिक में त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिग और मध्यप्रदेश में उज्जैन है, लेकिन अनेक लोग इन दो जगहों पर नहीं जा पाते तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। देश में अनेक स्थानों पर कालसर्प दोष की शांति करवाई जा सकती है। आइए जानते हैं वे स्थान-

  • श्रीलूत कालहस्तीश्वर : दक्षिण भारत में तिरुपति बालाजी से 50 किलोमीटर पर कालहस्ती शिव मंदिर है। यहां शिव के एकादश रुद्रावतारों में से स्वयंभू शिवलिंग है।
  • त्रयंबकेश्वर, महाराष्ट्र : त्रयंबकेश्वर में द्वादश ज्योतिर्लिग में से एक स्थापित है। यहां कालसर्प दोष की शांति पूजा होती है। यह प्रमुख स्थान है। यहां नाग नागिन का चांदी का जोड़ा बनवाकर जल में प्रवाहित करने से पितृ दोष की भी शांति होती है।
  • प्रयाग संगम : इलाहाबाद संगम पर कालसर्प, पितृदोष शांति कर्म के लिए नाग-नागिन पूजा कर दूध के साथ जल में प्रवाहित किया जाता है।
  • त्रियुगी नारायण मंदिर : उत्तरांचल में केदारनाथ से 15 किलोमीटर दूर त्रियुगी नारायण मंदिर है। यहां स्वर्ण, चांदी या तांबे के अष्टनाग जोड़े अर्पित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसी स्थान पर भगवान शिव-पार्वती का विवाह हुआ था।
  • त्रिनागेश्वर : दक्षिण भारत में तंजोर जिले में त्रिनागेश्वर वासुकिनाथ मंदिर में राहु काल में अभिषेक करने का विधान है।
  • बद्रीनाथ धाम : बद्रीनाथ में कालसर्प और पितृदोष शांति की जाती है। यहां ब्रह्मकपाल नामक स्थान पर शिवजी द्वारा ब्रह्मा का पांचवां मस्तक गिराया गया था। शिवजी ने ब्रह्मकपाल को अपने गले में धारण किया था और इसी स्थान पर ब्रह्ममुंड से मुक्ति पाई थी। यह स्थान ब्रह्म हत्या, ब्रह्म शाप, कालसर्पादि दोषों से मुक्ति का सिद्ध स्थान है।
  • उज्जैन : मध्यप्रदेश में भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन कालसर्प दोष की शांति पूजा का प्रमुख स्थान है। यहां रामघाट पर पूजा होती है।
  • ओंकारेश्वर : मध्यप्रदेश में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिग शिवजी का सिद्ध पीठ है। यह यहां नर्मदा नदी के किनारे पंडित एक हजार पार्थिव शिवलिंग का पूजन अभिषेक करवाकर कालसर्प दोष की शांति करवाते हैं।
  • इसके अलावा दक्षिण भारत के नागपट्टनम जिले में एलनगुढ़ी नामक स्थान, उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में नाग लिंगेश्वर शिव मंदिर, दक्षिण भारत के चित्तूर जिले के कानिपाकम ग्राम में वरसिद्धि विनायक मंदिर, उत्तरप्रदेश के इटावा शहर शहर की दक्षिणी पूर्वी सीमा पर नीलकंठ मंदिर, उत्तरप्रदेश में यमुना तट, दक्षिण भारत के नागपट्टनम जिले में वैदहीश्वरम मंदिर, मप्र के नागदा में जन्मेजय मंदिर, दक्षिण भारत में पंचतत्व मंदिर, काचीकामकोटि के निकट पृथ्वीतत्व शिवलिंग, तिरुच्चि के निकट जलतत्व शिवलिंग, चेन्नई से 200 किलोमीटर चिदंबरम स्थान पर आकाशतत्व शिवलिंग पर कालसर्प दोष की शांति करवाई जा सकती है।

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