Benefits of Camphor: कीटाणुओं को वातावरण से दूर रखता है कपूर
नई दिल्ली। इन दिनों कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण एक बार फिर कपूर के महत्व की बात उठने लगी है। हिंदू पूजा पद्धति में आरती करते समय उपयोग किया जाने वाला कपूर वातावरण को शुद्ध रखने का काम करता है। यह वैज्ञानिक भी साबित कर चुके हैं कि जिस घर में नियमित रूप से कपूर जलाया जाता है वहां के वातावरण में कीटाणु आदि नहीं पनप पाते हैं। भारतीय पूजा पद्धति एक वैज्ञानिक पद्धति है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले प्रत्येक पदार्थ का एक वैज्ञानिक महत्व है। यूं ही किसी वस्तु का उपयोग नहीं किया जाता।

कपूर जलाने का भी वैज्ञानिक महत्व है। घर में कपूर जलाने से बैक्टीरिया, कीटाणु नष्ट होते हैं और यह नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित करता है। इसके अलावा कपूर का उपयोग बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है। इसीलिए वेदों के साथ आयुर्वेद में भी कपूर का वर्णन प्रमुखता से किया गया है। ... तो इन दिनों चारों ओर फैले वायरस, कीटाणुओं केा माहौल में अपने आसपास के परिवेश को शुद्ध रखने का काम आप कपूर जलाकर कर सकते हैं।
ये हैं कपूर जलाने के लाभ...
- जिस घर में नियमित कपूर जलाया जाता है, वहां की वायु स्वच्छ रहती है। सुबह-शाम कपूर जलाने से बाहरी नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती।
- देसी कपूर जलाने से हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। खासकर प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बीमारियों से बचने के लिए कपूर जलाना चाहिए।
- कपूर जलाने से बैक्टीरिया, कीटाणु, मच्छर आदि घर में प्रवेश नहीं करते।
- कपूर को बारीक पीसकर पानी में डालकर पोंछा लगाने से चींटी, कीड़े नहीं आते।
- किसी भी प्रकार के वास्तुदोष को दूर करने में कपूर प्रभावी असर दिखाता है। घर के जिस कमरे में शुद्ध वायु आने-जाने के लिए खिड़की, रोशनदान आदि न हों वहां कांच के बर्तन में कपूर रखने से शुद्ध वायु का संचार होता है। और वास्तुदोष भी समाप्त होता है।
- एक सूती कपड़े में थोड़ा सा देसी कपूर और लौंग की दो-तीन कलियां रखकर बांध लें। इसे अपने जेब में रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में सूंघते रहने से सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक रोगों का ज्यादा प्रभाव नहीं हो पाता।












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