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जीव-जंतुओं से जानें कौन सी भूमि शुभ रहेगी और कौन सी अशुभ?

वास्तुशास्त्र में ऐसे कई संकेत बताए गए हैं, जिन पर ध्यान देकर आप स्वयं जान सकते हैं कि आपके द्वारा खरीदी जा रही भूमि किस तरह का फल देने वाली है।

नई दिल्ली। जमीन खरीदना, मकान बनवाना हर व्यक्ति का सपना होता है। अपने जीवनभर की खून-पसीने के कमाई की पाई-पाई बचाकर हर कोई अपने सिर पर एक छत की ख्वाहिश रखता है, जो उसकी अपनी हो, जिसका वो मालिक हो।

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इस जीवन भर के ख्वाब को पूरा करने के लिए जब कोई जमीन या प्लॉट खरीदने निकलता है, तो सबसे पहले मन में प्रश्न आता है कि क्या ये खरीदी उचित होगी? क्या यही वह जमीन है, जिसे पाकर सारा जीवन सुकून से बीतेगा, जिस पर चारदीवारी तानकर जीवन के सब सुख हासिल किए जा सकेंगे? ऐसी मानसिकता के साथ संशय में झूल रहा इंसान कभी इस जानकार, तो कभी उस पंडित के पास दौड़ लगाता है।

सही मार्गदर्शन के अभाव में

इसके बावजूद सही मार्गदर्शन के अभाव में कई बार ऐसी भूमि क्रय कर ली जाती है, जो अशुभ साबित होती है और उस पर मकान बनवाने के बाद जीवन नर्क बन जाता है। ऐसी अप्रिय स्थिति आपके साथ ना बने इसलिए कुछ ऐसी बातें जानते हैं, जिन पर जरा सा ध्यान देने मात्र से आप बहुत सी कठिनाइयों से बच सकते हैं।

साधारण जीव जंतुओं का सहयोग शामिल

वास्तुशास्त्र में ऐसे कई संकेत बताए गए हैं, जिन पर ध्यान देकर आप स्वयं जान सकते हैं कि आपके द्वारा खरीदी जा रही भूमि किस तरह का फल देने वाली है। इन संकेतों में बहुत से साधारण जीव जंतुओं का सहयोग शामिल है, जिनके निवास पर नजर रख पाना बहुत ही आसानी से जान सकते हैं कि कोई भूखंड आपके लिए उपयुक्त है या नहीं।

आइये, देखते हैं जीव जंतुओं की मदद से भूमि का परीक्षण कैसे किया जा सकता है..

 निषिद्ध भूमि

निषिद्ध भूमि

  • जिस भूमि पर सांप या बिच्छू रहते हों, ऐसी भूमि मकान बनवाने के लिए अनुपयुक्त मानी गई है। सांप, बिच्छू आदि जीव राहू के प्रतीक माने जाते हैं, इसीलिए इनके निवास वाली भूमि राहू प्रधान कहलाती है। इस प्रकार की भूमि पर मकान बनवाने से घर में रोगों का वास होता है। घर का कोई ना कोई सदस्य लगातार रोगी बना रहता है।
  • यदि भूमि पर दीमक का घर बना हो, तो ऐसी जमीन मकान बनाने के लिए सर्वथा निषिद्ध मानी जाती है। दीमक भी राहू का प्रतीक है। दीमक वाली जमीन पर मकान बनवाने से घर में सदा आर्थिक संकट बना रहता है। व्यवसाय में घाटा होता है। बार बार कर्ज लेने की स्थिति बनती है। घर में लगातार बीमारी बनी रहती है और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु तक हो सकती है। ऐसी भूमि पर रहने वाला व्यक्ति कामवासना से युक्त, षड्यंत्रकारी हो जाता है, मांस मदिरा का सेवन करने लगता है।
  • जुआ, लाटरी, सट्टा आदि के चक्कर में पड़कर आर्थिक क्षति की स्थिति भी बनती है।
  •  शनि प्रधान भूमि रहने के लिए वर्जित

    शनि प्रधान भूमि रहने के लिए वर्जित

    • जिस भूमि पर बंदरों का वास हो, वह शनि प्रधान होती है। इस प्रकार की भूमि मकान बनाने के लिए अनुपयुक्त मानी गई है। ऐसी जमीन पर मकान बनाने से घर में दुख दरिद्रता का वास होता है और नित्य शोक व भय बना रहता है। इस भूमि पर रहने वाले व्यक्ति को परिश्रम अधिक करना पड़ता है, फिर भी हर कार्य विलंब से होता है। शनि प्रधान भूमि रहने के लिए वर्जित है, पर बिजनेस के लिए बहुत हितकारी है। ऐसी भूमि पर लगाए गए कारखाने अवश्य फलते-फूलते हैं।
    • जिस भूमि पर गधे, कुत्ते, सियार, सुअर आदि अपवित्र जीव नियमित रूप से रहते या बैठते हैं, वह अपवित्र मानी जाती है। ऐसी भूमि पर मकान बनाना लाभप्रद नहीं रहता।
    • जिस भूमि पर बाघ, तेंदुआ, सिंह जैसे हिंसक पशु रहते हैं, वह भी मकान बनाने के लिए अनुपयुक्त मानी जाती है। ऐसी जमीन केतु या मंगल प्रधान होती है। ऐसी जमीन पर मकान बनाने पर घर में क्लेश का वातावरण बनता है और जातक के स्वभाव में हिंसा भाव प्रबल होता जाता है।

    शापित भूमि

    शापित भूमि

    कुछ प्लॉट या जमीनें शापित या बाधायुक्त होती हैं। ऐसी भूमि पर मकान बनाने वाले कभी भी मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं रहते। उनके मन में बराबर अशुभ एवं डरावने विचार आते रहते हैं। इस तरह के विचारों में फंसकर वे खुद भी चिंताग्रस्त बने रहते हैं। ऐसी भूमि पर कदम रखते ही मन में अजीब से भाव आने लगते हैं। बिना जानकारी के भी ऐसा भान होने लगता है कि यहां कुछ गड़बड़ है। सुनसान, रहस्यमयी या खंडहर जैसी जगहें इसी श्रेणी में आती हैं। ऐसी भूमि पर निवास करने से मन में पाप भाव या कुविचार की उत्पत्ति हो

    सिद्ध भूमि

    सिद्ध भूमि

    उपर्युक्त विश्लेषण पढ़ने के बाद यह विचार मन में आना स्वाभाविक है कि इतने निषेधों के बाद किस तरह यह जाना जाए कि कौन सी भूमि मकान बनाने के लिए श्रेष्ठ होगी?

    आइये, अब जानते हैं ऐसी ही भूमि और उसके संकेतों के बारे में-

    • जिस भूमि पर नेवलों का वास हो, वह मकान बनाने के लिए सर्वथा उपयुक्त मानी गई है। इसका कारण यह है कि नेवला सूर्य का प्रतीक है और सूर्य राहू- केतु के शत्रु माने जाते हैं।
    • सूर्य के प्रभाव के आगे ब्रह्मांड की समस्त आसुरी व पाप शक्तियां निस्तेज हैं। यही वजह है कि नेवले के निवास वाली भूमि पर भूतप्रेत या आसुरी शक्तियों का प्रभाव नहीं रहता।
    • ऐसी भूमि पर निवास करने वाले व्यक्ति को यश, लाभ, संपत्ति, विजय और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
    • जिस भूमि पर घोड़ों का निवास हो...

      जिस भूमि पर घोड़ों का निवास हो...

      • जिस भूमि पर घोड़ों का निवास हो, वह भी सूर्यप्रधान होती है। घोड़ों के अस्तबल वाली भूमि या जहां पर घोड़े चरते हों, दोनों ही मकान बनाने के लिए शुभ मानी जाती हैं। घोड़े सूर्यवंशी कहे गए हैं। ऐसी भूमि पर मकान बनाने पर आरोग्य और संपत्ति की प्राप्ति होती है। इस भूमि के निवासी हृदय रोगों से भी मुक्त रहते हैं। निवास के लिए यह भूमि सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
      • हिंदू धर्म में गाय के समान पवित्र प्राणी कोई और नहीं है। लाल रंग की गाय सूर्य और सफेद रंग की गाय बृहस्पति का प्रतीक मानी गई है। सूर्य यश और धन का कारक है तो बृहस्पति को धन संपदा का कारक ग्रह माना जाता है। इस हिसाब से गौशाला के पास की भूमि मकान के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। लेकिन ध्यान रहे, गौशाला की जमीन या गाय के चारागाह के स्थान पर कभी मकान ना बनवाएं। ऐसी भूमि पर मकान बनवाने वाला जीवन भर दुखी रहता है और मृत्यु के बाद नर्क में जाता है।
      • जिस भूमि पर बड़ी संख्या में कौए रहते हैं, वह लक्ष्मीप्रदायक होती है। जिस भूमि पर कौए शाम या रात में रहते हैं, वहां गुप्त धन रहता है। कौओं की अधिकता वाली भूमि पर मकान बनवाने से ऐश्वर्य में वृद्धि होती है। ऐसे मकान मे रहने वालों को पितृकृपा से काफी धन संपत्ति मिलती है।

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