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Gauri Rudraksha: नि:संतान दंपतियों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं 'गौरी रुद्राक्ष'

By Pt. Gajendra Sharma
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    नई दिल्ली। रूद्राक्ष भगवान शिव को अतिप्रिय है। यह शिव के नेत्रों से गिरी अश्रु की बूंदों से उत्पन्न् हुआ है इसलिए सर्वत्र पूजनीय और पवित्र है। रूद्राक्ष अनेक मुखों वाले पाए जाते हैं और कुछ विशिष्ट प्रकार के होते हैं। उन्हीं विशिष्ट रूद्राक्षों में से एक है गर्भ गौरी रूद्राक्ष। इसे गणेश गौरी रूद्राक्ष भी कहा जाता है। इसमें दो रूद्राक्ष आपस में जुड़े हुए होते हैं, जिनमें एक बड़ा और एक छोटा होता है। बड़ा रूद्राक्ष माता पार्वती का प्रतीक है और छोटा रूद्राक्ष उनके पुत्र गणेश का। 

    संतान सुख प्राप्त करने के लिए धारण कीजिए 'गर्भ गौरी रूद्राक्ष'

    संतान सुख प्राप्त करने के लिए धारण कीजिए 'गर्भ गौरी रूद्राक्ष'

    गर्भ गौरी रूद्राक्ष उन दंपतियों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है जिन्हें अब तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है। इस रूद्राक्ष को नि:संतान स्त्री धारण करे तो वह जल्द ही माता बन सकती है। साथ ही यह रूद्राक्ष उन गर्भवती स्त्रियों के लिए भी काफी प्रभावी माना गया है जिन्हें गर्भावस्था के दौरान अनेक परेशानियां आ रही हो। यह रूद्राक्ष गर्भ की रक्षा करके स्वस्थ संतान को जन्म देने में मदद करता है।

    'गर्भ गौरी रुद्राक्ष' धारण करने के लाभ

    'गर्भ गौरी रुद्राक्ष' धारण करने के लाभ

    • यदि कोई स्त्री मातृ सुख या संतान सुख पाना चाहती है, तो उसे गर्भ गौरी रुद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए।
    • गर्भ गौरी रुद्राक्ष को गले में धारण करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और मन प्रफुल्लित रहता है।
    • गर्भाधान में देरी या कोई समस्या आ रही है तो गर्भ गौरी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।
    मां और संतान के बीच मधुर संबंध बनाने के लिए धारण करें

    मां और संतान के बीच मधुर संबंध बनाने के लिए धारण करें

    • मां और संतान के बीच मधुर संबंध बनाने के लिए भी 'गर्भ गौरी रुद्राक्ष' धारण किया जाता है।
    • इस रूद्राक्ष को धारण करने से गर्भपात का खतरा नहीं रहता।
    • जो गर्भवती स्त्री इस रूद्राक्ष को धारण करती है, उसकी प्रसूती भी आराम से हो जाती है।
    • जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु पीड़ा दे रहे हों उन्हें भी यह रूद्राक्ष धारण करना चाहिए।
    पहनने की विधि

    पहनने की विधि

    'गर्भ गौरी रूद्राक्ष' को सोमवार के दिन धारण किया जाता है। इसे पहले गंगाजल से अच्छी तरह धो लें। फिर पूजा स्थान में लाल कपड़ा बिछाकर इसे रखें और चंदन का तिलक रूद्राक्ष को लगाएं। धूप और अगरबत्ती दिखाएं। रूद्राक्ष पर सफेद रंग के पुष्प अर्पित करें। इसके बाद रुद्राक्ष को दाएं हाथ में लेकर ऊं नम: शिवाय मंत्र की एक माला जाप करें। इसके बाद रूद्राक्ष को शिवलिंग से टच करवाकर धारण कर लें। इसे चांदी की चेन या लाल धागे में गले में पहना जा सकता है।

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    English summary
    Knowabout the Benefits of Gauri Ganesh Rudraksha, its a Boon for Childless Couple.

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