Kaal Sarp Dosh: कुंडली में सर्प दोष है तो संतान पैदा होने में आती है बाधा
नई दिल्ली, 18 जुलाई। कई दंपती विवाह के वर्षो बाद भी संतान नहीं होने से दुखी हैं। आधुनिक मेडिकल जांच में पति-पत्नी दोनों संतानोत्पत्ति में सक्षम होने के बाद भी संतान का न होना चिंता में डालता है। ऐसे में ज्योतिषीय परामर्श सही मार्ग दिखा सकता है। शारीरिक रूप से सक्षम होने के बाद भी संतान पैदा नहीं कर पाने के पीछे सर्प दोष भी एक कारण हो सकता है। योग्य ज्योतिषी स्त्री-पुरुष की कुंडली देखकर यह बता सकता है। यदि पति-पत्नी में से किसी एक की कुंडली में भी सर्प दोष या नाग दोष है तो संतान उत्पन्न करने में बाधा निश्चित रूप से आती है।

कैसे बनता है सर्प दोष
जन्मकुंडली का पंचम भाव संतान का कारक भाव होता है। यदि स्त्री या पुरुष की कुंडली के पंचम भाव में राहु हो तथा उस पर मंगल की दृष्टि हो या पंचम भाव में राहु हो तथा उस भाव का स्वामी मंगल हो तो सर्प दोष बनता है। ऐसी स्थिति में संतान उत्पत्ति में बाधा आती है या संतान विलंब से पैदा होती है या संतान पैदा होने के बाद अधिक समय जीवित नहीं रहती। ऐसे में सर्प दोष का निवारण करना अनिवार्य है।
सर्प दोष की अन्य स्थितियां
- यदि बलवान सूर्य, मंगल, शनि और राहु पांचवें भाव में हों तो संतान उत्पत्ति में रूकावट आती है।
- यदि कुंडली में मंगल दोष है और राहु लग्न में हो तथा पंचमेश में दुष्ट ग्रह हों तो सर्प दोष होता है।
- यदि लग्न का स्वामी पंचमेश या सप्तमेश होकर कमजोर हो तो जातक संतानहीन होता है।
- यदि पंचमेश राहु के साथ हो तथा शनि पांचवें भाव में स्थित होकर चंद्र से दृष्ट हो तो सर्प शाप दोष बनता है।
- यदि पंचम भाव में मंगल की राशि हो तथा राहु स्थित हो और बुध की दृष्टि हो तो सर्प शाप दोष होता है।
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सर्प शाप दोष का निवारण कैसे करें
सर्प शाप से ग्रसित व्यक्ति को नाग पूजा करनी चाहिए। शास्त्रों में स्वर्ण की नाग मूर्ति बनाकर पूजा करने का विधान है। भारत में नागपंचमी का त्योहार इसीलिए मनाया जाता है ताकिव्यक्ति इस अवसर पर नाग पूजा करके स्वत: ही सर्प शाप दोष से छुटकारा पा सकता है।












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