Chandra Yantra: मानसिक तनाव दूर करके आत्मविश्वास बढ़ाता है चंद्र यंत्र
नई दिल्ली। इन दिनों कोरोना वायरस के कारण लोगों के मन में भय, मानसिक तनाव, जॉब और बिजनेस को लेकर अनिश्चितता है। इस कारण उनके आत्मविश्वास में भी कमी आ गई है। कई लोगों की मानसिक स्थिति इतनी अधिक बिगड़ चुकी है कि उन्हें मनोचिकित्सकों की सलाह लेनी पड़ रही है। इन सबसे बचने के लिए एक ज्योतिषीय उपाय बहुत कारगर साबित हो सकता है। यह है चंद्र यंत्र की स्थापना या चंद्र यंत्र धारण करना।

चंद्र का असर मन पर पड़ता है
नवग्रहों में चंद्र सबसे अधिक गति से चलने वाला ग्रह है। यह प्रत्येक सवा दो दिन में अपनी राशि बदल लेता है। चंद्र का मनुष्य के मन और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए जन्म कुंडली में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। यह मन का कारक होता है। इसलिए यह मनुष्य की भावनाओं के साथ मस्तिष्क, बुद्धिमता, स्वभाव, रोगों, गर्भाशय इत्यादि को नियंत्रित करता है। अगर कुंडली में चंद्र कमजोर हो तो इस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

चंद्र यंत्र के लाभ
यदि आप आत्मविश्वास की कमी या डिप्रेशन के शिकार हैं तो आपको सिद्ध किया गया चंद्र यंत्र बहुत लाभ देता है। इस चंद्र यंत्र को गले में पेंडेंट के रूप में भी धारण किया जा सकता है या पूजा स्थान में यंत्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है। चंद्र यंत्र का नियमित पूजन बहुत लाभ देता है।
- चंद्र यंत्र की विधिवत पूजा कर स्थापना करने से मन को शांति मिलती है और मानसिक स्वास्थ मजबूत रहता है।
- चंद्र यंत्र धारण करने से व्यक्तित्व में निखार आता है।
- चंद्र यंत्र के माध्यम से चंद्र को मजबूत करके डिप्रेशन, तनाव, मानसिक बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
- यह माता से आपके संबंध सुधारता है।
- कमजोर चंद्र के कारण सर्दी-जुकाम, खांसी, फेफड़े और श्वसन संबंधी रोग होते हैं। चंद्र यंत्र धारण करके इन रोगों से बचा जा सकता है।
- चंद्र यंत्र समुद्र पारीय देशों से व्यापार करने वालों को लाभ देता है।
- जो विद्यार्थी विदेशों में पढ़ाई या जॉब का सपना देखते हैं उन्हें भी यह जरूर धारण करना चाहिए।
- यह कलात्मकता में वृद्धि करता है। रचनात्मक कार्य करने वालों को इसकी पूजा करना चाहिए।
- कर्क राशि और कर्क लग्न वालों के लिए यह ज्यादा लाभदायक है।

कैसे करें स्थापना
किसी भी शुभ मुहूर्त में घर के पूजा स्थान पर चंद्र यंत्र की स्थापना करें। इसके आगे धूप और दीप जलाएं। अब अपने ईष्ट देव के साथ-साथ चंद्रमा की भी आराधना करें और उनसे अपने और अपने परिवार पर कृपा बरसाने की प्रार्थना करें। गंगाजल छिड़क कर घी का दीया जलाएं। यदि पेंडेंट के रूप में चंद्र यंत्र धारण कर रहे हैं तो किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के सोमवार के दिन चांदी की चेन में इसे पहनें।
चंद्र यंत्र स्थापना विधि
शुक्ल पक्ष के सोमवार के दिन प्रातःकाल जागकर स्नानादि के पश्चात यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार चंद्र के बीज मंत्र ऊं श्रां श्रीं श्रूं सः चंद्राय स्वाहाः का जाप करें। चंद्र यंत्र पर गंगाजल छिड़कें, चंद्रदेव से उत्तम फल प्राप्ति की कामना करते हुए सुनिश्चित किए गए स्थान पर यंत्र को स्थापित कर दें। आप चाहें तो चंद्र यंत्र को बटुए और गले में भी धारण कर सकते हैं। नियमित रूप से इस यंत्र की पूजा करें। नियमित रूप से यंत्र को शुद्ध जल से स्नान कराएं।












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