Inspirational Story: परिश्रम से प्राप्त होती है संपत्ति

नई दिल्ली। संसार में ऐसा कौन है, जिसे संपत्ति की चाह नहीं है? हर व्यक्ति अपार धन पाने की चाह रखता है। ऐसा हो भी क्यों ना? आखिर धन में प्रचण्ड शक्ति होती है। धन में संसार को झुकाने की ताकत होती है। धनी व्यक्ति का सम्मान संसार सहज ही करता है। धन के साथ समस्त सुख- सुविधाएं आती हैं, जीवन आसान हो जाता है, समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं। धन में इतने गुण हैं कि हर कोई उसे पाने के लिए लालायित रहता है।लेकिन कहा जाता है कि धन सदा समर्थ को ही मिलता है। लक्ष्मी सदा उसी पर कृपालु होती हैं, जो परिश्रम करता है। आलसी व्यक्ति कभी धनी नहीं बन सकता। धन पाने का, धनाढ्य बनने का एक ही रास्ता है- कठिन परिश्रम।

Inspirational Story: परिश्रम से प्राप्त होती है संपत्ति

आज की कथा में इसी तथ्य को समझने का प्रयास करते हैं-

एक गांव में राधे नाम का एक किसान रहता था। राधे बड़ा परिश्रमी था, वह हर वक्त काम में लगा रहता था। उसके 4 बेटे थे, पर चारों ही महा आलसी थे। राधे के बेटे बस दो ही काम करते थे- खाना और सोना। राधे को बड़ी चिंता होती थी कि उसके बाद इन बच्चों का क्या होगा? उसने अपने बच्चों को लाख समझाया कि बिना मेहनत कुछ भी प्राप्त नहीं होता। यदि तुम परिश्रम नहीं करोगे, तो अपना ही जीवन बोझ बना लोगे। बेटों के आलस देख देख कर राधे की चिंता बढ़ती चली गई। एक दिन उसके प्रिय मित्र ने चिंता का कारण पूछा और ऐसा हल बताया कि राधे की बांछें खिल गईं। दूसरे दिन से ही राधे बीमार पड़ गया। बीमारी की कमज़ोरी में उसका चलना- फिरना ही दूभर हो गया। उसने अपने बेटों को बुलाकर कहा- मेरे प्यारे बेटों! लगता है कि मेरा अंतिम समय आ गया है। मेरी याददाश्त भी कमज़ोर हो रही है। मैने अथक परिश्रम करके कुछ सोना- चांदी जोड़ा था और उसे सुरक्षित रखने के लिए खेत में दबा दिया था। अब बीमारी के कारण मुझे वह स्थान याद नहीं आ रहा, जहां धन दबाया था। तुम लोग उस धन को ढूंढ लाओ, ताकि मैं तुम सबमें उसे बराबर बांट सकूँ।

राधे की बात सुनकर चारों बेटे खुशी से उछल पड़े

राधे की बात सुनकर चारों बेटे खुशी से उछल पड़े। वे तुरंत खेतों में पहुंच गए और ज़मीन खोद डाली। सारे खेत खोद डालने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। सभी बेटे निराश होकर बैठे ही थे कि राधे के मित्र के आकर कहा- बेटा ! जब खुदाई कर ही ली है, तो लगे हाथ ये बीज भी बो डालो। उनकी बात मानकर बेटों ने बुआई कर ली। अब मेहनत की थी, तो उसका फल पाने की इच्छा भी बेटों के मन में जागी। सब नियम से फसल का ध्यान रखने लगे और एक अकेले राधे की जगह चार बेटों की शक्ति से खेत लहलहा उठे। इधर फसल कटी, उधर राधे की तबियत ठीक हो गई। अपने बेटों के साथ फसल देखकर राधे ने हंसते हुए कहा- मेरे बच्चों! मैंने कहा था ना कि खेत में सोना गड़ा है। आखिर तुम अपनी मेहनत से सोना निकाल ही लाए। अब बच्चे भी राधे की बात का मर्म समझ चुके थे, तो पूरा परिवार ठहाका मारकर हंस पड़ा।

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