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Kemdrum Dosh: केमद्रुम योग भंग होने पर बनता है राजयोग

By Pt. Gajendra Sharma
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नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के प्रमुख ग्रहों में से एक केमद्रुम योग भी है जो व्यक्ति को न तो अधिक खराब और न ज्यादा अच्छा प्रभाव देता है, बल्कि यह योग जिस कुंडली में होता है उसे जातक को जीवन में आने वाले संघर्षों से लड़कर उनसे बाहर निकलने की शक्ति प्रदान करता है। केमद्रुम योग चंद्रमा द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण योग है। किसी जन्म कुंडली में जब चंद्रमा से दूसरे और बारहवें स्थान में कोई भी ग्रह ना हो तो केमद्रुम योग बनता है। इसके अलावा यदि चंद्र के साथ कोई ग्रह ना हो या चंद्र पर किसी अन्य शुभ ग्रह की सीधी दृष्टि नहीं पड़ रही हो तो भी केमद्रुम योग का निर्माण होता है। इस योग के निर्माण में राहु-केतु को मान्य नहीं किया जाता है।

वैदिक ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष की मान्यता है कि कुछ विशेष ग्रह योगों के बनने पर केमद्रुम योग भंग होकर राजयोग में परिवर्तित हो जाता है। जन्मकुंडली में लग्न से केंद्र स्थान में चंद्र या कोई अन्य ग्रह हो तो केमद्रुम योग भंग हो जाता है। इसके अलावा कुंडली में कुछ अन्य स्थितियां बनने पर भी यह योग भंग होता है। जैसे जब चंद्र शुभ ग्रहों के साथ युति बना रहा हो दसवें भाव में चंद्रमा उच्च का हो या केंद्र में चंद्रमा पूर्ण बली हो तो ऐसी स्थिति में केमद्रुम योग भंग हो जाता है। इस योग के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करने के लिए किसी योग्य ज्योतिष से कुंडली का अध्ययन करवा लेना चाहिए।

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केमद्रुम योग का प्रभाव

केमद्रुम योग का प्रभाव

वैदिक ज्योतिष की परिभाषा के अनुसार केमद्रुम योग ज्यादा अनिष्टकारी नहीं होता है। इस योग में जातक को सदैव अशुभ प्रभाव नहीं मिलते, बल्कि इस योग में जातक को जीवन के संघर्षों से जूझने और उनसे बाहर निकलने की क्षमता एवं शक्ति मिलती है। इस योग से प्रबल रूप से प्रभावित जातक परिवार से अलग हो जाता है। उसके जीवन से स्त्री, घर, वस्त्र छूट जाते हैं। इनकी आय के साधन छिन जाते हैं। केमद्रुम योग होने पर संघर्ष और अभाव से ग्रस्त जीवन व्यतीत करना पड़ता है। केमद्रुम योग का दूसरा पक्ष यह है कि कई जातकों को अपने कार्यक्षेत्र में सफलता के साथ उच्च स्तर का पद-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

केमद्रुम योग से बचने के उपाय

केमद्रुम योग से बचने के उपाय

  • योग के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए सोम पूर्णिमा अथवा सोमवार को चित्रा नक्षत्र से प्रारंभ करके लगातार चार वर्ष तक पूर्णमासी का व्रत रखना चाहिए।
  • सोमवार को शिव मंदिर में शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं और पूजा करें। माता पार्वती का भी पूजन करें।
  • भगवान शिव की आराधना से इस योग के अशुभ प्रभाव को कम करने में काफी मदद मिलती है। रूद्राक्ष की माला से 'ऊं नम: शिवाय" का प्रतिदिन जाप करें
  • चद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान करें जैसे, दूध, दही, आइसक्रीम, चावल, पानी आदि।
  • चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें।
  •  श्रीसूक्त का पाठ करें

    श्रीसूक्त का पाठ करें

    • प्रतिदिन सायंकाल संध्या पूजा के समय श्रीसूक्त का पाठ करें।
    • पूजा स्थल पर चांदी के छोटे से कलश में भरकर गंगा जल रखें।
    • अपने घर में दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करें और नियमित रूप से श्रीसूक्त का पाठ करें। इस शंख में जल भरकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर अर्पित करें। चांदी के श्रीयंत्र में मोती धारण करें। इस मोती को हमेशा अपने पास ही रखें।
    • प्रत्येक सोमवार को चावल और गाय के दूध की खीर बनाकर छोटे बच्चों को खिलाएं।

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English summary
The attraction to be alone, the situations can make you alone, mind full of imagination, the difficulty to adjust with the general public, family members and a distance evMHHen from your so called friends.
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