अपने स्वभाव और व्यवहार से जानिए किस ग्रह की आयु का प्रभाव है आप पर

How Do Planets Effect Your Personality And Character:भारतीय ज्योतिष में इतने गूढ़ रहस्य समाए हैं किइन्हें एक-एक कर सुलझाते जाएं तो मनुष्य के बारे में नित नई जानकारियां पता की जा सकती हैं। ज्योतिष के प्रमुख ग्रंथ जातक पारिजात में मनुष्य के रंग-रूप, गुण-धर्म, व्यवहार-स्वभाव आदि के बारे में ग्रहों और राशियों के आधार पर सटीक आकलन दिया हुआ है। जिनका विश्लेषण करके पता किया जा सकता है किकिस मनुष्य पर किस ग्रह का सर्वाधिक प्रभाव है। जातक पारिजात में प्रत्येक ग्रह की एक निश्चित वय अर्थात् आयु कही गई है। जो ग्रह जिस आयु का होता है वह मनुष्य में उसी आयु के अनुसार स्वभाव और रुचियां पैदा करता है।

व्यवहार से जानिए किस ग्रह की आयु का प्रभाव है आप पर

आइए जानते हैं इसे विस्तार से-

जातक पारिजात के द्वितीय अध्याय के 14वें श्लोक के अनुसार-
बालो धराजो शशिज: कुमारकस्ति्रंशद्गुरु: षोडशवत्सर: सित: ।
पंचाशदर्को विधुरब्दसप्तति: शताब्दसंज्ञा: शनिराहुकेतव: ।।

अर्थात्

  • मंगल को बालक कहा गया है। मंगल का संबंध पराक्रम से है। जिस प्रकार बालक अनेकों बार गिरकर भी पुन: दौड़ता- मस्ती करता रहता है। यदि उसे कहा जाए किबेटा वहां आग है वहां न जाओ तो भी जाने से डरता नहीं। जिन जातकों का मंगल प्रबल होता है, उनमें स्वाभाविक रूप से पराक्रम रहता है। जीवनभर उन पर एक तरह के बालपन की छाया रहती है। उनके स्वभाव में, व्यवहार में एक प्रकार का बचपना झलकता है।
  • बुध को कुमार कहा गया है। कुमारावस्था में मनुष्य हास्य-विनोद, कला, कौतुक, नए-नए मित्र बनाने, नई बातें जानने को उत्सुक रहता है वह सब बुध के प्रभाव से देखा जाता है। अर्थात् बुध प्रधान मनुष्यों ने जीवनभर इस तरह की प्रवृत्ति देखी जा सकती है। ये उम्रभर नए-नए दोस्तों में दिलचस्पी लेते रहे हैं। इनका स्वभाव हंसी-मजाक वाला होता है।
  • शुक्र को 16 वर्ष का कहा गया है। शुक्र सौंदर्य, आकर्षण, भोल-विलास, श्रंृगार आदि का ग्रह होता है। अपने स्वभाव के अनुसार शुक्र प्रधान मनुष्यों में ये प्रवृत्ति जीवनभर देखी जाती है। जिन लोगों को शुक्र प्रबल होता है वे रूप श्रंृगार, सजने-संवरने, सौंदर्य प्रसाधनों, नए वस्त्र-आभूषण आदि में खूब रुचि लेते हैं। इनका व्यक्तित्व आकर्षक होता है। ये विपरीत लिंगी व्यक्तियों के प्रति जीवनभर आकर्षित रहते हैं। कहने का तात्पर्य यह है किशुक्र की प्रधानता वाले मनुष्य जीवनभर स्वयं को 16 वर्ष की आयु वाले मनुष्य के समान दिखाने का प्रयत्न करते रहते हैं।
  • बृहस्पति को 30 वर्ष का कहा गया है। 30 वर्ष की आयु तक मनुष्य में स्वाभाविक रूप से गुरुता, गंभीरता, मैच्योरिटी, परिपक्वता आ जाती है। वह स्वयं और परिवार की जिम्मेदारी संभालने लायक हो जाता है। उसमें अच्छे-बुरे का निर्णय लेने की स्वाभाविक प्रवृत्ति आ जाती है। इसलिए जिन मनुष्यों पर बृहस्पति का सर्वाधिक प्रभाव होता है उनमें बचपन से एक प्रकार की गंभीरता, जिम्मेदारी वाला भाव आ जाता है।
  • सूर्य को 50 वर्ष का कहा गया है। इस अवस्था में सूर्य के गुण जैसे क्रोध बढ़ना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आना, बाल कम होना, घर और कार्यस्थल पर शासन करने की प्रवृत्ति आ जाना जैसे गुण देखे जाते हैं। इसलिए जिन मनुष्यों का सूर्य सब ग्रहों पर भारी पड़ता है, उनमें प्रारंभ से ऐसे गुणों की प्रधानता रहती है।
  • चंद्र को 70 वर्ष का कहा गया है। 70 वर्ष के मनुष्य में कफ, कृशता, बाल सफेद होने जैसी बातें देखने में आती है। वृद्ध मनुष्य खांसता रहता है, उसे कफ की समस्या रहती है। तो जिन लोगों में चंद्र की प्रधानता होती है, उनमें शुरू से ऐसे लक्षण देखे जाते हैं। उनके बाल कम आयु में सफेद हो जाते हैं। शरीर दुबला-पतला हो जाता है, कफ की समस्या रहती है।
  • शनि, राहु, केतु को 100 वर्ष का कहा गया है। सौ वर्ष की आयु में त्वचा पर झुर्रियां आ जाती है। त्वचा ढीली हो जाती है, दुर्बलता, क्रोध की अधिकता, अनेक रोगों का होना देखा जाता है। जिन लोगों के शनि, राहु, केतु भारी है, या इनकी प्रधानता है उनमें ये सारे गुण प्रारंभ से देखे जाते हैं। ऐसे मनुष्यों की त्वचा खराब रहती है, वह अनेक प्रकार के रोगों से घिरा रहता है, शरीर एकदम कमजोर सा रहता है।
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