वैशाख स्नान 19 अप्रैल से 18 मई तक, लक्ष्मी-विष्णु की करें आराधना
नई दिल्ली। हिंदू धर्म शास्त्र में नदियों को पवित्र और देवी के समान स्थान दिया गया है। इनमें स्नान करना मोक्षप्रद और विशेष पुण्यकारी होता है। इसलिए वर्ष के सबसे अधिक पुण्यकारी महीनों में स्नान किया जाता है। ऐसे ही पवित्र महीनों में से एक है वैशाख माह। चैत्र पूर्णिमा से वैशाख पूर्णिमा तक वैशाख स्नान किया जाता है। इस बार वैशाख स्नान 19 अप्रैल हनुमान जयंती से प्रारंभ होकर 18 मई बुद्ध पूर्णिमा तक किया जाएगा।

वैशाख स्नान
पुराण कथा के अनुसार महीरथ नामक राजा ने केवल वैशाख स्नान करके ही वैकुंठधाम प्राप्त किया था। इसमें व्रती को प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्याेदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या कुएं पर जाकर स्नान करना चाहिए। यदि आसपास नदी उपलब्ध ना हो तो घर में ही गंगा आदि पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए तथा वैशाख माह के महात्म्य की कथा सुनना चाहिए। पूरे माह व्रती एक समय ही भोजन करें।

क्या करें वैशाख माह में
- इस माह में जलदान का विशेष महत्व है। अपने पूर्वजों के नाम पर प्याऊ लगवाएं। राहगीरों के साथ पशु-पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करें।
- इस माह में जरूरतमंद व्यक्ति को पंखा दान किया जाता है। पहले के समय में घास-फूस के बने पंखों का दान किया जाता है।
- खरबूजा, मौसमी फल, नए कपड़े दान करें।
- वैशाख माह में प्रतिदिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। इससे जीवन में सुख-शांति, संपत्ति, भोग विलास के साधन प्राप्त होते हैं।
- भगवान विष्णु के साथ इस माह में मां लक्ष्मी की आराधना भी करें। लाल गुलाब का फूल या कमल का पुष्प मां लक्ष्मी का जरूर अर्पित करें इससे अटूट धन की प्राप्ति होती है।
- वैशाख स्नान के समापन पर बुद्ध पूर्णिमा के दिन नदियों में दीपदान का काफी महत्व है।

क्या नहीं करें
स्कंद पुराण के अनुसार वैशाख मास में कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं। उन्हें करने से बचना चाहिए। वैशाख माह में तेल मालिश करना, दिन में सोना, दो बार भोजन करना, सूर्यास्त के बाद खाना वर्जित माने गए हैं।












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