अबूझ मुहूर्त भड़ली नवमी 10 जुलाई को, जानिए इसका महत्व
नई दिल्ली। आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि को भड़ली नवमी पर्व मनाया जाता है। इस दिन आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है। इसलिए यह दिन खास होता है। इस वर्ष भड़ली नवमी 10 जुलाई बुधवार को आ रही है। देवशयनी एकादशी से पहले भड़ली नवमी को विवाह के लिए सबसे शुभ और आखिरी दिन माना जाता है। शास्त्रीय मान्यता है कि यह दिन विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। इस दिन विवाह करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की भी आश्यकता नहीं होती है।

ये होते हैं वर्ष के अबूझ मुहूर्त
हिंदू शास्त्रीय पंचांग के अनुसार साल में अनेक अबूझ मुहूर्त आते हैं, जिनमें किसी शुभ कार्य को करने से पहले पंचांग शुद्धि देखने की जरूरत नहीं होती है। ये दिन अपने आप में शुभ माने गए हैं। ये खास दिन हैं वसंत पंचमी, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की दूज- फुलेरा दूज, राम नवमी, जानकी नवमी, वैशाख पूर्णिमा, गंगा दशमी, भड़ली नवमी, अक्षय तृतीया, विजयादशमी।

क्यों महत्वपूर्ण है भड़ली नवमी
भड़ली नवमी महत्वपूर्ण इसलिए मानी गई है क्योंकि इसके दो दिन बाद देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। इसलिए देवशयनी एकादशी से पूर्व अंतिम शुभ मुहूर्त होता है जिसमें बिना पंचांग देखे या पंडित की सलाह के समस्त शुभ काम किए जा सकते हैं।

लक्ष्मी नारायण को समर्पित है भड़ली नवमी
भड़ली नवमी के दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा का विधान है। कई राज्यों में इस दिन व्रत रखकर शाम के समय भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा की जाती है। यह पूजा सत्यनारायण पूजा की तरह होती है। इस दिन परिवार, मित्रों आदि बंधु-बांधवों को बुलाकर लक्ष्मी नारायण की पूजा, कथा की जाती है। प्रसाद वितरण किया जाता है और सामूहिक भोज किया जाता है। चातुर्मास शुरू होने से दो दिन पूर्व इस दिन उत्सव मनाया जाता है और चातुर्मास में संयम, नियम धर्म से रहते हुए भगवान विष्णु की निरंतर आराधना का संकल्प भी लिया जाता है।












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