Gular Plant: योनि विकारों में बहुत फायदेमंद है गूलर, जानिए इसके चमत्कारिक फायदे
लखनऊ। गूलर दो प्रकार का होता है। नदी उदुम्बर और कठूमर। गूलर शीतल, गर्भसंधानकारक, रूक्ष, कैसेला, भारी, मधुर व वर्ण को उज्जवल करने वाला। कफपित्त, अतिसार आदि रोगों को नष्ट करने वाला। यह दूध दाता वृक्ष की श्रेणी में आता तथा सहज सुलभ होने वाला वृक्ष है। आईये जानते है गूलर के और क्या-क्या फायदे है।
- पुत्र प्राप्ति-सन्तानहीन स्त्री ऋतु धर्म से पूर्व अपने उदर की शुद्धि कर लेने के उपरान्त गूलर के बाॅदें को बकरी के दूध के साथ पीसे फिर मासिक धर्म की शुद्धि के पश्चात सेंवन कर लें। ऐसा करने से सन्तान की प्राप्ति होती है, ये योनि विकारों में भी बहुत फायदेमंद है।
- सन्तान सुख-यदि किसी को सन्तान होती है, किन्तु वह गर्भ या गर्भ के बाहर आने पर उसकी मृत्यु हो जाती है तो गुरू-पुष्य योग में गूलर को लकड़ी को अभिमंत्रित करके स्त्री अपने बाजू या कमर में बांध लें।

अशांति को दूर करता है
- सम्मोहन सम्मान-गूलर की लकड़ी को अभिमंत्रित जड़ को घिसकर माथे पर तिलक लगाने से आपके व्यक्तित्व की ओर लोग आकर्षित होने लगते है।
- मंगलकारी-घर में अगर किसी प्रकार की अशांति या दरिद्रता बनी रहती है तो गूलर की जड़ को अभिमंत्रित करके अपने शयन कक्ष में रखने से घर में शान्ति का माहौल रहता है एवं समृद्धि आती है।
- धनाभाव-इसकी जड़ को किसी शुभ मुहूर्त में लाये फिर इसे अभिमंत्रित करके कपड़े में लपेटकर चाॅदी या ताॅबें के ताबीज में भरकर रखें। यह ताबीज पहनने या पास रखने से जातक को धन की समस्या नहीं रहती है।
- साधना की शीघ्र सिद्धि हेतु-सांसारिक वैभव और सौख्य सामग्री की उपलब्धि के लिए गूलर के बाॅदें को रोहिणी नक्षत्र में विधिवत अभिमंत्रित करके घर में स्थापित करना चाहिए। मृगशिरा नक्षत्र में सिघोट का बाॅदा पान में रखकर खाने से जिस देवता की साधना की जाये। वह शीघ्र ही सिद्ध हो जाती है।
- कमजोरी दूर करने के लिए-गूलर की छाल का पाउडर में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेंवन करने से किसी भी प्राकार की कमजोरी दूर हो जाती है।
- ह्रदय विकार-यदि आप ह्रदय रोग से पीड़ित है तो गूलर के पत्तों का रस नियमित सेंवन करने से लाभ मिलता है।

साधना की शीघ्र सिद्धि हेतु

यदि आप ह्रदय रोग से पीड़ित है तो....

शुक्र को मजबूत करने हेतु
यदि आपका शुक्र ग्रह पीड़ित होकर अशुभ फल दे रहा है तो घर में एक गूलर का पेड़ लगायें, गूलर की जड़ को अपने पास रखें या ‘‘ऊॅशं शुक्राय नमः‘‘ मन्त्र का 16 हजार बार जाप करके फिर गूलर की लकड़ी से दशांश हवन करने से शुक्र ग्रह शुभ फल देने लगता है।












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