Kumbh Mela 2019 : कल्पवास का महत्व और स्नान तिथियां
लखनऊ। मकर संक्रांति (सूर्य के मकर में प्रवेश करते समय महीने के पहले दिन से शुरू होने वाले कुंभ में प्रत्येक दिन के स्नान को पवित्र स्नान माना जाता है। हर वर्ष श्रद्धालू पूरे एक महीने तक गंगा नदी के तट पर अल्पाहार, स्नान, ध्यान व दान करके कल्पवास करते है। कल्पवास पौष माह के 11वें दिन से माघ माह के 12वें दिन तक रहता है। इस बार का कल्पवास विशेष फलदायी रहेगा क्योंकि प्रयाग में अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन हो रहा है। कुंभ में कल्पवास करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। कल्पवास का अर्थ होता है संगम के तट पर निवास कर वेदाध्ययन और ध्यान करना। शास्त्रों में प्रयाग इलाहाबाद कुम्भ मेले में कल्पवास का अत्यधिक महत्व माना गया है।

कल्पवास के लिए उम्र की कोई बाध्यता नहीं
वैसे तो कल्पवास के लिए उम्र की कोई बाध्यता नहीं है, लेकिन फिर भी माना जाता है कि अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा कर चुके व्यक्ति को ही कल्पवास करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि जिम्मेदारियों से बंधे व्यक्ति के लिए आत्मनियंत्रण कठिन माना जाता है। कल्पवास वेदकालीन अरण्य संस्कृति की देन है। कल्पवास का विधान हजारों वर्षों से चला आ रहा है। जब तीर्थराज प्रयाग में कोई शहर नहीं था तब यह भूमि ऋषियों की तपोस्थली थी। प्रयाग में गंगा-जमुना के आसपास घना जंगल था। इस जंगल में ऋषि-मुनि ध्यान और तप करते थे। ऋषियों ने गृहस्थों के लिए कल्पवास का विधान रखा। उनके अनुसार इस दौरान गृहस्थों को अल्पकाल के लिए शिक्षा और दीक्षा दी जाती थी।

कल्पवास की विधि
- इस दौरान जो भी गृहस्थ कल्पवास का संकल्प लेकर आया है वह पर्ण कुटी में रहता है। इस दौरान दिन में एक ही बार भोजन किया जाता है तथा मानसिक रूप से धैर्य, अहिंसा और भक्तिभावपूर्ण रहा जाता है।
- झोपड़ियों (पर्ण कुटी) में रहने वालों की दिनचर्या सुबह गंगा-स्नान के बाद संध्यावंदन से प्रारंभ होती है और देर रात तक प्रवचन और भजन-कीर्तन जैसे आध्यात्मिक कार्यों के साथ समाप्त होती है।
- पद्म पुराण में इसका उल्लेख है। संगम तट पर वास करने वाले को सदाचारी, शान्त मन वाला तथा जितेन्द्रिय होना चाहिए। कल्पवासी के मुख्य कार्य हैः- 1. तप, 2. होम और 3. दान।
- महत्व-ऐसी मान्यता है कि जो कल्पवास की प्रतिज्ञा करता है वह अगले जन्म में राजा के रूप में जन्म लेता है लेकिन जो मोक्ष की अभिलाषा लेकर कल्पवास करता है उसे अवश्य मोक्ष मिलता है।
- मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान) 14/15 जनवरी 2019
- पौष पूर्णमा, 21 जनवरी 2019 (मंगलवार)
- मौनी अमावस्या (दूसरा शाही स्नान) 4 फरवरी 2019 (मंगलवार)
- बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान) 10 फरवरी 2019 (रविवार)।
- माघी पूर्णिमा 19 फरवरी 2019 (मंगलवार)
- महा शिवरात्रि 4 मार्च 2019 (सोमवार)

तुलसी व शालिग्राम की स्थापना
कल्पवास की शुरूआत के पहले दिन तुलसी और शालिग्राम की स्थापना और पूजन होता है। कल्पवासी अपने टैंट के बाहर जौ का बीज रोपित करता है। कल्पवास की समाप्ति पर इस पौधे को कल्पवासी अपने साथ ले जाता है। जबकि तुलसी को गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है।

कल्पवास में स्नान-दान की प्रमुख तिथियां
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