व्यर्थ न करें कल का दिन, जन्माष्टमी का ऐसा महायोग 8 साल बाद आयेगा
इस वर्ष शिक्षक दिवस 5 सितम्बर शनिवार को भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को महाजन्माष्टमी पूरे देश में मनाई जाएगी। ऐसे तीन योग हैं, जो कई वर्षो बाद बने हैं। 26 वर्षों बाद जन्माष्टमी बृहस्पति, सूर्य सिंह संक्रांति में आयी है 20 वर्षों बाद स्मार्त एवं वैष्णवों दोनों संप्रदाय की जन्माष्टमी साथ में आयी है। 2 वर्षों बाद अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र में पूरे दिन रहेगी और ऐसा अगला महायोग 8 साल बाद 6/9/2023 में बनेगा।
जन्माष्टमी के लिए धर्मसिन्धु के अनुसार जो आवश्यक योग माने गये हैं, उनमें प्रमुख रूप से अष्टमी तिथि जो रात्रि 3:10 बजे तक रहेगी, रोहिणी नक्षत्र रात्रि 12:10 बजे तक रहेगा। मध्यरात्रि 12 बजे पूजन का सबसे अच्छा मुहूर्त है। यह जन्माष्टमी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र, उच्च वृषभ राशि में चन्द्र, सिंह का सूर्य, कन्या का बुध अमृत सिद्दी तथा सर्वार्थ सिद्दी योग में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसबार वही योग बन रहा है। इस कारण बृहस्पति उदय तथा शुक्र मार्गी होने जा रहे हैं।
जन्माष्टमी को तंत्र की 4 महारात्रियों मे से एक माना गया है। इस रात्रि में अष्टमी तथा रोहिणी नक्षत्र का आना अति शुभ माना जाता है। इस बार यह महारात्रि भी इन्ही योगों में होने के कारण अति शुभ एवं सिद्दी दायक होगी। ऐसे योगों में विशेष रूप से शनि, राहु, केतु, भूत, प्रेत, वशीकरण, सम्मोहन, भक्ति और प्रेम के प्रयोग एवं उपाय करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी
तस्वीरों के साथ पढ़ें विशष उपाये जो लायेंगे घर में सुख समृद्धि-

संकल्प उपवास
किसी संकल्प को लेकर उपवास करें रात्रि में भी भोजन न लें। आपका संकल्प जरूर पूरा होगा।

संतान प्राप्ति के लिये
कृष्ण पूजन, अभिषेक, कर जन्मउत्सव मनायें। गोपाल, कृष्ण, राधा या विष्णुसहस्त्र नाम का पाठ व तुलसी अर्चन करें।

घर से पीड़ा दूर करने के लिये
धनिये की पंजरी का भोग लगा कर प्रसाद वितरण करें। इष्ट मूर्ति, मंत्र, यंत्र की विशेष पूजा व साधना करें।

पति-पत्नी में प्रेम बढ़ाने के लिये
श्री राधा कृष्ण बीजमंत्र का जप करें। काले तिल व् सर्व ओषधि युक्त जल से स्नान करें।

भूत प्रेत बाधा निवारण
भूत प्रेत व बुरी शक्तियों से घर की रक्षा के लिये सुदर्शन प्रयोग, रामरक्षा, देवीकवच का पाठ करें।












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