होलिकादहन के शुभ मुहूर्त, कष्ट दूर करने के उपाय
[ज्योतिषाचार्य पं. अनुज के शुक्ल] रंगो भरे मनोरंजन का पर्व होली हमारे देश के प्रमुख त्यौहारों के श्रेणी में आता है। यह एक रागरंग का त्यौहार है। इसका रंग सर्वदा एक समान देखा जाता है। होली का आरम्भ एक प्रकार का वसन्त महोत्सव था। इस दिन राजा-प्रजा सब बसन्तागमन के उपलक्ष्य में खूब रागरंग मनाते थे। प्राचीन संस्कृत-साहित्य में इसे मदन महोत्सव भी कहा गया है। इस विचित्र त्यौहार में वर्णाश्रम धर्म की किसी मर्यादा की कटटरता नहीं रह गयी है।
जिस प्रकार दीपावली में दीपकों की उष्णता व तैल की गंध से चातुर्मास्य के संचित कीटाणुओं का नाश होता है, उसी प्रकार शीतकाल में संचित रोगों के कीटाणुओं का नाश होलिका जलने से उत्पन्न गहरे अग्निताप व अबीर-गुलाल आदि की गंध से होता है। गाना, हॅसना और तेज आवज में बोलने से गले का व्यायाम होता है एंव गुलाल-अबीर आदि का गले में जाना फेफड़ों व गलें में अवरूद्ध कफ की निवृत्ति में उपयोगी है। अतः होलिकोत्सव की विधि स्वास्थ्य रक्षा के नियमानुकूल है।
पर विशेष प्रस्तुति- नेताओं की पोल खोली है
कई राज्यों में होलिकादहन को संवत् जलाने का त्यौहार मानते है। फाल्गुन शुक्लअष्टमी से पूर्णिमा पर्यंत आठ दिन होलाष्ठक मनाया जाता है। भारत के कई प्रदेशो में होलाष्ठक के शुरू होने पर एक पेड़ की शाखा काटकर उस पर रंग बिरंगे कपड़ों के टुकड़े बांधे जाते है व उस शाखा को जमीन में गाड़कर उसके नीचे मदमस्त होकर लोग गाते-बजाते हुये होलिकोत्सव का पर्व मनाते है।
होली के दिन यदि प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा हो और भद्रा रहे तो भद्रा की समाप्ति के बाद या भद्रा की पूंछ पर (समाप्ति के समय) होली जलायी जानी चाहिए। भद्राकाल में होलिकादहन शास्त्र के अनुसार निषिद्ध है। क्योंकि इससे नगर, जनपद या समस्त राष्ट्र में अशान्ति का वातावरण उत्पन्न हो जाता है।
होलिकादहन का मुहूर्त- 26 मार्च को भद्रा सांय 4:24 मि0 से रात्रि 3:44 मि0 तक रहेगी। भद्रा का अन्तिम समय रात्रि 11:41 मि0 से 12:20 तक रहेगा। अतः इस मुहूर्त में होलिकादहन करना शुभ रहेगा।
तस्वीरों के सामने लिखे हैं होली की राख के अचूक उपाय-

यदि कोई निरंतर बीमार है
यदि कोई व्यक्ति निरन्तर बीमार रहता है, और काफी दवा कराने के बावजूद भी रोग में कोई लाभ नहीं हो रहा है, तो होली दहन के समय देशी घी में दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता इन सभी वस्तुओं को होली जलने वाली आग में डाल दें। अगले दिन होली की राख रोगी के शरीर में लगायें और तत्पश्चात गर्म जल से स्नान करायें। इस उपाय से रोगी शीघ्र ही स्वस्थ्य होने लगेगा।

वशीकरण करना चाहते हैं
कोई व्यक्ति अभिचार कर्म के कारण अर्थात मारण, विद्वेषण, उच्चाटन, सम्मोहन व वशीकरण से अक्रान्त हो तो वह व्यक्ति उपरोक्त विधि से होलिका की राख शरीर में लगाकर गर्म जल से स्नान कराने से नकारात्मक प्रभाव निर्मूल हो जाता है।

पति दूसरी औरत के चक्कर में है
यदि किसी का पति दूसरी महिला के सम्पर्क में रहता है, तो आप होली पर उपरोक्त सामग्री अर्पित करें एंव 7 बार होली की जलती आग की परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय 1 गोमती चक्र अपने पति का नाम लेकर आग में डालें। ऐसा करने से महिला का पति उसके पास वापस लौट आयेगा।

यदि किसी ने कोई टोटका करवाया है
यदि आपको ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ने आपके उपर तान्त्रिक प्रयोग करवा दिया है, तो आप होली दहन के समय देशी घी में दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता और थोड़ी सी मिश्री इन सभी वस्तुओं को होली जलने वाली आग में डाल दें। अगले दिन हेाली राख को चाॅदी के ताबीज में भर कर गलें में धारण करने से तान्त्रिक प्रभाव निष्क्रिय हो जायेगा।

धन वापस लेना चाहते हैं
यदि कोई व्यक्ति आपका लिया हुआ धन वापिस नहीं कर रहा है, तो आप होली जलने वाले स्थान पर अनार की लकड़ी से उसका नाम लिखकर होलिका माता से अपने धन वापसी का निवेदन करते हुये उसके नाम पर हरा गुलाल छिड़क दें। इस उपाय से आपका धन मिल जायेगा।

शत्रुता समाप्त करना चाहते हैं
यदि आप किसी से शत्रुता समाप्त करना चाहते है तो होलिका दहन के अगले दिन उसी स्थान पर रात्रि 12 बजे जाकर होली जलने स्थान पर अनार की लकड़ी से उसका लिख दें और फिर उसे बायें हाथ से मिटा दें और उस स्थान की थोड़ी सी राख लाकर। अगले दिन उस व्यक्ति के सिर पर डाल दें। ऐसा करने से वह व्यक्ति आपके प्रति शत्रुता का भाव समाप्त कर देगा।

यदि कोई ग्रह दूषित है
यदि आपकी जन्मपत्री में कोई ग्रह दूषित हो तो आप होली दहन के समय देशी घी में दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता इन सभी वस्तुओं को होली जलने वाली आग में डाल दें। अगले दिन उस राख को लाकर स्वार्थसिद्धि योग में शुद्ध करके बहते जल में प्रवाहित कर दें।

यदि कोई बाधा आ रही है
यदि आपको राज्यपक्ष से बाधा आ रही है तो आप होलिका के उल्टे फेरे प्रारम्भ करें। प्रत्येक फेरे की समाप्ति पर आक की जड़ जलती होली में फेंके। इस उपाय को करने से आपको राज्य पक्ष से मिलने वाली सारी बाधायें समाप्त हो जायेगी।

वास्तु दोष दूर करें
वास्तुदोषों से मुक्ति पाने के लिए होली दहन के अगले दिन आप सर्वप्रथम अपने इष्ट देव को गुलाल अर्पित कर अपने निवास के ईशान कोण पर पूजन कर गुलाल चढ़ायें। यह उपाय करने से आपका घर वास्तुदोष से मुक्त हो जायेगा।

कोई भय सता रहा है
यदि किसी के उपर कोई भय का साया है तो वह होली पर एक नारियल, एक जोड़ा लौंग व पीली सरसों इन सभी वस्तुओं को लेकर पीडि़त व्यक्ति के उपर से 21 बार उतार होली की अग्नि में डाल दें। सारा दुष्प्रभाव समाप्त हो जायेगा।

आर्थिक हानि हुई हो
यदि आपको बार-2 आर्थिक हानि का सामना करना पड़ रहा है तो आप होलिका दहन की शाम को अपने मुख्यद्वार की चैखट पर दोमुखी आटे का दीपक बनायें। चैखट पर थोड़ा सा गुलाल छिड़ककर दीपक जलाकर रख देना चाहिए। दीपक जलने के साथ ही मानसिक रूप से आर्थिक हानि दूर होने के लिए निवेदन करना चाहिए। यह उपाय कारगर सिद्ध होगा।

किसी की नजर लग गई है
किसी बालक अथवा बड़े को शीघ्र ही नजर लगती हो तो होली दहन के समय देशी घी में दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता इन सभी वस्तुओं को होली जलने वाली आग में डाल दें। अगले दिन होली की राख को तांबे या चांदी के ताबीज में भरकर काले धागे में बाॅधकर गले में धारण करने से कभी भी नजर दोष नहीं लगता है।












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