AI In Health Care: हेल्थ केयर में तहलका मचाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डॉक्टरों की हो जाएगी छुट्टी?
AI In Health Care: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब शिक्षा से लेकर रोजगार और धार्मिक क्षेत्र तक में इस्तेमाल हो रहा है। हेल्थ सेक्टर में एआई बड़ी क्रांति ला सकता है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक ऐसा एआई तैयार किया है, जो बीमारियों को पहचानने से लेकर उनके इलाज में इंसानी डॉक्टरों की तुलना में चार गुना तक ज्यादा सटीक है। कंपनी के AI डिवीजन के सीईओ मुस्तफा सुलेमान ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक मेडिकल सुपरइंटेलिजेंस की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
माइक्रोसॉफ्ट की टीम ने इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की है। न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ मेडिसिन की तैयार की गई 304 मेडिकल केस स्टडी के आधार पर एक सीक्वेशनल डायग्नोस्टिक बेंचमार्क टेस्ट तैयार किया गया था। इस परीक्षण के जरिए यह देखना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किसी सामान्य डॉक्टर की तरह बीमारी की पहचान कर सकता है या नहीं। अगर बीमारी पकड़ता है, तो यह कितना सटीक हो सकता है। इसके नतीजे हैरान करने वाले आए।

AI In Health Care: माइक्रोसॉफ्ट का अहम टेस्ट
माइक्रोसॉफ्ट ने इसके लिए MAI Diagnostic Orchestrator (MAI-DxO) नामक सिस्टम तैयार किया। यह सिस्टम एक साथ OpenAI का GPT, Google Gemini, Anthropic Claude, Meta LLaMA और Grok जैसे एआई टूल्स से सवाल पूछे। उनसे किसी सामान्य डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवालों की तरह वार्तालाप प्रक्रिया की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, MAI-DxO ने इस प्रक्रिया में बीमारी को 80% तक सटीक पकड़ा है। माइक्रोसॉफ्ट एआई के सीईओ मुस्तफा सुलेमान ने कहा, 'ये AI एजेंट्स का कोऑर्डिनेटेड काम ही हमें मेडिकल सुपरइंटेलिजेंस के और करीब लाएगा।'
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उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब हम अलग करके नहीं देख सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट की योजना है कि हम भविष्य में इस तकनीक को बिंज समेत दूसरे टूल्स के साथ जोड़ेंगे। इससे आम उपयोगकर्ताओं को अपनी बीमारी के सभी कारण, उनका उपचार समेत दूसरे सवालों के पारदर्शी ढंग से जवाब मिल सकेंगे। फिलहाल इस तकनीक को कारोबारी दुनिया में लॉन्च नहीं किया गया है, लेकिन कंपनी भविष्य में ऐसा कर सकती है। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ वर्षों में इसे रियल-वर्ल्ड हेल्थ सेटअप में उतारा जाएगा।
हेल्थ सेक्टर में AI को लेकर कई शंकाएं भी हैं
यह तकनीक बीमारियों का पता लगाने और उनके सही उपचार में बहुत कारगर साबित हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद भी विशेषज्ञ इसके प्रभावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। डेटा विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें डेटा के साथ छेड़छाड़ की बहुत आशंका है। एआई मॉडल को जिन डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है, वो 100 फीसदी निष्पक्ष नहीं होते हैं। इसकी बहुत संभावना है कि डेटा में किसी आबादी समूह के एक ही हिस्से का बड़ा प्रतिनिधित्व हो। ऐसे में निष्कर्षों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
इतना तो तय है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं में किया जा सकता है। अगर यह कुशल तरीके से लागू किया जाए, तो आम लोगों के बीच स्वास्थ्य और बीमारी को लेकर जागरुकता बढ़ेगी। इतना ही नहीं इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्चों में भी कटौती की जा सकती है।
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