दीवाली पर कैसे करें गणेश-लक्ष्मी का पूजन?

दीपावली के दिन सुबह उठकर पितृगण व देवताओं का पूजन करे तथा पितरों के निमित्त श्राद्ध। इसके उपरान्त अपने घर, दुकान, ऑफिस, को विविध प्रकार के पुष्प, आम और केले की पत्तियों से सजायें। घर के मुख्यद्वार के दोनों तरफ मांगलिक कलश व नारियल रखें। आजकल बाजार में रेडीमेट कलश व नारियल आ रहे हैं, जिनका इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
अगर संभव हो तो दिन भर उपवास रखें। शाम को मां लक्ष्मी की आराधना करने के पश्चात ही भोजन करें। श्री महालक्ष्मी का पूजन करने से पूर्व एक चैकी या पाटे पर अपनी बायीं तरफ सफेद वस्त्र व दाहिने तरफ लाल वस्त्र विछायें। अब रेशमी वस्त्र पहनाकर श्री गणेश व श्री लक्ष्मी जी की मूर्ति को ऊंची चैकी पर विराजमान करें।
सफेद वस्त्र पर चावल के नौं खाने, नवग्रहों के लिए बनायें और लाल वस्त्र पर गेंहू या आटे के 16 खाना बना लें। अब मां लक्ष्मी की आराधना इस मंत्र से करें-
"ऊँ अश्वपूर्वा रबमहयां हस्तिनाद प्रबोधिनीम। श्रियं देवीमुपहये श्रीर्मादेवी जुषताम। महालक्ष्मै नमः आसनं समर्पयामि।।"
इस मंत्र को पढ़कर पुष्प अर्पित करें। इसके पश्चात असचमन, स्नान, पंचामृत, वस्त्र, शहद, आभूषण, गंध, चन्दन, अमीर-गुलाल, सिंन्दूर, मीठा, फल, कुमकुम, बेलपत्र, कमल का फूल आदि मां लक्ष्मी की मूर्ति पर चढ़ायें। अब मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसके गले में रक्षा सूत्र बांध दें। एक दिये में देशी घी व रूई की बत्ती तैयार करें एंव एक बड़ी थाली में कलावा, चावल, फल-फूल, गुड़ और जल आदि समस्त सामग्री रख लें।
तत्पश्चात पूर्व दिशा की तरफ अपना मुख करके आसन पर बैठ जायें तथा अपने बायें तरफ दीपक की स्थापना कर उसे प्रज्जवल्लित करें। लक्ष्मी जी की मूर्ति के पास ही किसी थाली में केशरयुक्त चन्दन में अष्टदल कमल बनाकर उस पर द्रव्य यानि रूपये चढ़ायें। तत्पश्चात श्री सूक्त लक्ष्मी सहस्रनाम का जाप स्थिर लग्न में करना चाहिए, क्योंकि जिससें आपके घर में श्री लक्ष्मी जी की स्थिरिता बनी रही और आप धन, समृद्धि व वैभव से परिपूर्ण रहें।
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