मानसून में देरी, सरकार की नज़र

लोग गर्मी से बेहाल हैं और इन क्षेत्रों में पारा पिछले एक हफ्ते से क़रीब पैंतालीस डिग्री तक पहुंच रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले एक हफ्ते तक भी मानसून के दर्शन नहीं होते हैं तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है और कृषि पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.
मानसून में हो रही देरी से एक ओर किसान फसलों पर होने वाले असर की आशंका से परेशान हैं तो दूसरी ओर भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है.
पूर्वी और मध्य भारत में मानसून में नियत तिथि से बारह दिन की देरी हो चुकी है लेकिन अभी भी उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं देती.
''बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ इन सब इलाकों में अब तक मानसून पहुंच जाता है लेकिन अभी तक नहीं पहुंच सका है. कह सकते हैं कि दस से बारह दिन की देरी हो चुकी है बीपी यादव, मौसम विभाग
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मौसम विभाग के निदेशक बीपी यादव कहते हैं, ''बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ इन सब इलाकों में अब तक मानसून पहुंच जाता है लेकिन अभी तक नहीं पहुंच सका है. कह सकते हैं कि दस से बारह दिन की देरी हो चुकी है.''
बीपी यादव जिन क्षेत्रों का ज़िक्र कर रहे थे वहां मानसून की देरी में अन्य कारणों के अलावा हाल ही में बंगाल में आए तूफ़ान आइला को भी बताया जा रहा है. बीपी यादव भी इसे स्वीकार करते हैं.
मौसम विभाग के अधिकारी कहते हैं कि मानसून में ये देरी कोई ख़ास बात नहीं है और फिलहाल इससे कोई बहुत नुकसान की भी आशंका नहीं है.
उन्हें उम्मीद है कि एक दो दिनों में मध्य और पूर्वी भारत में मानसून आ जाएगा. लेकिन जानकारों का कहना है अभी तक तो दिल्ली में मानसून पूर्व फुहारें भी नहीं आई हैं इसलिए मानसून के आने में अभी भी कम से कम हफ्ते भर का समय लगेगा.
कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि अभी स्थिति भले ही गंभीर न हो लेकिन मानसून आने में एक हफ्ते की भी देरी कृषि क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा सकती है.
वो कहते हैं, ''स्थिति चिंताजनक तो है लेकिन घबराने जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि अभी एक हफ्ते का समय है, लेकिन अगर एक हफ्ते तक मानसून और नहीं आता है, तब ज़रूर समस्या गंभीर हो सकती है.''
वैसे बिहार में तो स्थिति अभी ही इतनी गंभीर हो गई है कि लोग गर्मी से त्राहि- त्राहि कर रहे हैं और फसलें सूख रही हैं.
केंद्र सरकार भी मानसून में देरी को लेकर काफी चिंतित है वो भी तब जबकि दो जुलाई से बजट सत्र शुरू हो रहा है.
केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चौहान का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय में इस बारे में नियमित चर्चा होगी और जो कुछ भी क़दम उठाने होंगे उसकी जानकारी पच्चीस तारीख को दी जाएगी.
लेकिन आम लोग तो आसमान की ओर ही देख रहे हैं कि कब बादल घुमडें, बारिश हो और तपती गर्मी से कुछ राहत मिले. रही बात किसानों की तो उन्हें सिर्फ फुहारों से नहीं मूसलाधार बारिश से ही राहत मिल पाएगी.


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