Software Engineer बना सफल किसान, 30 वर्षीय बिहारी ने कंप्यूटर छोड़ खेत में दिखाया कमाल
मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर की खेती से प्रेरित होकर एक 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर किसान बन बैठा। बिहार के युवा किसान की कहानी। kishanganj bihar dragon fruit farming software engineer jaimini krishna
किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के रूप में पांच साल पहले 2017 में पंजीकृत हुई संस्था Deccan Exotics किसानों के साथ-साथ इनोवेटिव आइडिया पर काम करने वाले लोगों के लिए प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। इसके फाउंडर डॉ श्रीनिवास बताते हैं कि उनके इस एफपीओ के माध्यम से देश भर के किसानों को ड्रैगन फ्रूट से जुड़े हर पहलू पर मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। खास बात ये कि उनकी कोशिश से प्रेरित 30 साल का युवा Software Engineer जैसी लग्जरीयस नौकरी छोड़कर खेतों में किस्मत आजमाने उतर आया। बिहार का ये युवा भी डॉ श्रीनिवास की मदद से कामयाबी के झंडे गाड़ रहा है। जानिए प्रेरक सक्सेस स्टोरी

ऑडियो-वीडियो कॉल के जरिए सलाह
एक सफल ड्रैगन फ्रूट फार्मर डॉ श्रीनिवास तेलंगाना में रहते हैं। डॉ श्रीनिवास ने ड्रैगन फ्रूट की खेती में पहले खुद को एक्सपर्ट बनाया, देश-विदेश घूमकर अनुभव हासिल करने के बाद अब डॉ श्रीनिवास खुद किसानों के साथ रोपण, पोषण, कटाई और बाजार में बेचने से जुड़ी बातें शेयर करते हैं। उन्होंने बताया कि किसान जरूरत पड़ने पर सीधे हमारे फार्म पर जा सकते हैं। अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी हो रहा है। किसान ऑडियो या वीडियो कॉल के जरिए भी सलाह ले सकते हैं। पौधों की क्वालिटी पर डॉ श्रीनिवास ने बताया, हम उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराते हैं। पौधों की कीमत लगभग 60 रुपये से 70 रुपये होती है। ये अमाउंट बाजार में बिकने वाले एक फल की लागत के बराबर है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैमिनी कृष्णा की कृष्णा
डॉ श्रीनिवास किसानों की मदद करने के लिए उनकी उपज की वापस खरीदारी भी तकते हैं। उन्होंने अब तक देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले 5,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया है। इनमें से 1,000 से अधिक किसान वर्तमान में ड्रैगन फ्रूट की सफल खेती कर भी रहे हैं। बिहार के एक 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर जैमिनी कृष्णा ने खेती में अपना शौक पूरा करने के लिए नौकरी छोड़कर डॉ श्रीनिवास के संपर्क में आए।

2020 में डॉ श्रीनिवास के खेत का दौरा किया
उन्होंने किशनगंज में अपने गांव में ड्रैगन फ्रूट उगाने के लिए डेक्कन एक्सोटिक्स से ट्रेनिंग ली। जैमिनी बताते हैं कि उन्होंने 2020 में डॉ श्रीनिवास के खेत का दौरा किया। पूरा दिन यह सीखने में बीता कि ड्रैगन फ्रूट्स की खेती कैसे की जाती है। वहां से पौधे भी खरीदेने के बाद किशनगंज में 2.5 एकड़ भूमि पर जैमिनी ने ड्रैगन फ्रूट के पौधों की रोपाई की। अब उन्हें अच्छी उपज भी मिल रही है।

किशनगंज में ड्रैगन फ्रूट
जैमिनी बताते हैं कि डॉ राव मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। फोन पर बातें हो जाती हैं। जब भी कोई संदेह होता है, डॉ श्रीनिवास के गाइडेंस मिलता है। बकौल जैमिनी, अब डेढ़ साल हो गए हैं। हम छठी बार अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट की कटाई करने वाले हैं। इस वर्ष लगभग 1.5 टन प्रति एकड़ उपज की उम्मीद है। किशनगंज में ड्रैगन फ्रूट की खेती और फलों की गुणवत्ता के आधार पर जैमिनी स्वदेशी ड्रैगन फ्रूट के लिए लगभग 180 रुपये से 300 रुपये प्रति किलो के बीच की कीमत मिलने का दावा भी करते हैं।

ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने की पहल
भारत में ड्रैगन फ्रूट की कम खेती क्यों होती है ? इस सवाल पर डॉ राव कहते हैं, भारत में ड्रैगन फ्रूट्स फार्मिंग में बहुत बड़ी गुंजाइश है। हालांकि, इस दिशा में ज्यादा खोज नहीं की गई है। ऐसे में किसानों को इस विकल्प के बारे में अधिक जानकारी नहीं। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने भी हाल के दिनों में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने की पहल की है, लेकिन अच्छे पौधे सबसे बड़ी चुनौती होते हैं।

डेक्कन एक्सोटिक्स का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये
डॉ श्रीनिवास बतात हैं कि सबसे बड़ी समस्या यह है किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे नहीं मिलना। यह सत्यापित करना महत्वपूर्ण है कि ड्रैगन फ्रूट के पौधे खरीदने और खेती की शुरुआत से पहले अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे मिलें। खुद की आर्थिक और कृषि कार्य की सफलता पर डॉ श्रीनिवास बताते हैं कि डेक्कन एक्सोटिक्स का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपये है। ड्रैगन फ्रूट फार्मिंग पर अनुसंधान और ट्रेनिंग के अलावा, वे वैल्यू ऐडेड उत्पाद भी तैयार करते हैं।

एवोकैडो जैसे अन्य विदेशी फलों पर भी रिसर्च की योजना
ड्रैगन फ्रूट के अलावा दूसरे उत्पादों के बारे में डॉ श्रीनिवास बताते हैं कि डेक्कन एक्सोटिक्स जैम, जेली, आइसक्रीम जैसी चीजें भी बनाने लगी है। छोटे पैमाने पर बनने वाले इन उत्पादों से डॉ श्रीनिवास को अतिरिक्त आमदनी भी होती है। डेक्कन एक्सोटिक्स की भावी योजना पर डॉ राव बताते हैं कि अब एवोकैडो जैसे अन्य विदेशी फलों पर भी रिसर्च की योजना है। उन्होंने कहा, ड्रैगन फ्रूट फार्मिंग में मिली सफलता से उत्साहित होने के बाद अब वे अपने अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।












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