बाबा नगरी का बागवान फूलों की खेती से हुआ मालामाल, जानिए 'वकील' की खेती की प्रेरक दास्तां
फूलों की खेती में वकील प्रसाद (floriculture wakil prasad) ने कामयाबी हासिल की है। फूलों के अलावा वकील फलों और सब्जियों की बागवानी भी कर रहे हैं। पढ़िए, खेती से कमाई बढ़ाने के तरीके
देवघर (झारखंड) , 23 जून : फूलों की खेती वर्तमान दौर में किसानों के लिए फायदे का सौदा है बड़े पैमाने पर धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा साज-सज्जा के कामों में भी फूलों का उपयोग होता है आए दिन होने वाले बड़े आयोजनों में फूलों से की जाने वाली डेकोरेशन में विदेशी पुल के साथ-साथ देश में फूफा जी ने वाले आकर्षक रंग बिरंगे फूलों की भारी डिमांड होती है आर्थिक संभावनाओं को पहचानते हुए झारखंड के देवघर में रहने वाले किसान वकील प्रसाद ने फूलों की खेती (floriculture wakil prasad) में कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। फूलों के कारोबार पर आधारित वनइंडिया हिंदी की इस सक्सेस स्टोरी में पढ़िए देवघर के फ्लावर फार्मर वकील प्रसाद ने कैसे फूलों की मार्केट में संभावनाएं पहचानीं और आज लाखों रुपए कमा रहे हैं।
किसान वकील को भारत सरकार की स्कीम से लाभ
केंद्र सरकार की योजना सॉयल हेल्थ कार्ड से लाभान्वित हुए देवघर के किसान वकील प्रसाद यादव बताते हैं कि मिट्टी जांच के पहले डीएपी और यूरिया डालकर फसल उगाते थे। धीरे-धीरे फसल की पैदावार घटने लगती थी। जांच के बाद उर्वरक डालने की मात्रा और तरीका दोनों बदला। जांच के बाद पता चला कि मिट्टी में कौन सा खाद कितनी मात्रा में देना है। मिट्टी जांच की रिपोर्ट के हिसाब से उर्वरक का इस्तेमाल करने पर पैदावार बढ़ी। फसल को नुकसान भी कम हुआ। फर्टिलाइजर और कंपोस्ट की मात्रा भी जरूरत के हिसाब से डाली जाती है। खेती की लागत में कमी आती है।

सॉयल हेल्थ कार्ड मिला तो चुनी एकीकृत खेती
सॉयल हेल्थ कार्ड का लाभ उठाने के बाद फूलों की खेती यानी फ्लोरीकल्चर में कामयाबी हासिल करने वाले किसान वकील प्रसाद यादव बताते हैं की फूलों की खेती के अलावा कुछ सब्जियों और फलों की खेती भी करते हैं। जिसे अंग्रेजी में इंटीग्रेटेड फार्मिंग कहा जाता है यानी, एकीकृत खेती। कृषि जागरण डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक फूलों के अलावा सब्जियों और फलों का उत्पादन करने वाले वकील प्रसाद ने बागवानी में सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। हालांकि, वकील प्रसाद पारंपरिक तरीकों और वैज्ञानिक उपायों का संतुलन बनाकर खेती करते हैं।

देवघर में फूलों का बाजार
वकील प्रसाद बताते हैं कि एकीकृत खेती के तहत वह फूलों के अलावा सब्जियों और फूलों की खेती भी करते हैं। साथ ही वे पौधों की नर्सरी भी चलाते हैं। वकील प्रसाद बीजों का व्यापार भी करते हैं। फूलों के कारोबार से पॉपुलर हुए देवघर के फ्लावर फार्मर वकील प्रसाद ने फूलों की मार्केट में संभावनाओं को पहचाना। फूलों की खेती और बिक्री से लाखों रुपए कमा रहे वकील प्रसाद बताते हैं कि देवघर की पहचान एक धार्मिक नगरी के रूप में है और श्रद्धालु बड़े पैमाने पर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन करने आते हैं। ऐसे में मंदिरों में फूलों की अच्छी खासी डिमांड होती है। ये बेचने वालों के लिए आर्थिक रूप से समृद्ध होने का सुनहरा अवसर है।

गेंदे का फूल 50-60 रुपये प्रति किलो
वकील प्रसाद बताते हैं कि देवघर में कई बार स्थानीय लोगों के बीच ही फूलों की इतनी डिमांड होती है कि फूलों की आपूर्ति नहीं हो पाती। ऐसे में फूल उगाने पर जितना ध्यान दिया जाए इस कारोबार में उतना ही मुनाफा कमाया जा सकता है। कोरोना महामारी के दौरान लागू लॉकडाउन के बारे में वकील प्रसाद बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण फूलों के बाजार पर मार पड़ी थी, लेकिन फिर भी गेंदे का फूल 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिक जाता है। इसके अलावा ग्लेडियोलस के फूल 10 से 15 रुपये प्रति पीस, जबकि जरबेरा 15 से 20 रुपये प्रति पीस आसपास बिक जाता है। उन्होंने बताया कि आम लोग सीधे दुकानदारों से फूल खरीदते हैं, लेकिन फूल उगाने वाले किसानों को अपने उत्पाद की मार्केटिंग में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों का जोर अधिक से अधिक फूलों के उत्पादन पर होता है

फूलों के अलावा फलों की बागवानी
बता दें कि फूलों की खेती को वैज्ञानिक भाषा में फ्लोरीकल्चर कहा जाता है। बागवानी को हॉर्टिकल्चर कहा जाता है। फूलों के खेती के अलावा 10 साल पहले शुरू हुई राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत वकील प्रसाद ने फलों का बगीचा भी लगाया है। 2008 में उन्होंने नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के तहत 200 से 250 पौधों की रोपाई की। पौधों के अच्छे रखरखाव के कारण वकील प्रसाद के पास वर्तमान में 400 से 500 आम के पेड़ हैं। बागवानी से अच्छी आमदनी की संभावना के बारे में वकील प्रसाद बताते हैं कि लोग उनके बागानों को देखने आते हैं। कम उपजाऊ जमीन पर फूलों की खेती के अलावा बागवानी युवाओं के लिए मिसाल बन रही है।

फूलों की कई किस्मों की खेती कर सकते हैं किसान
उन्होंने कहा कि फूलों की खेती में मजदूरी कम लगती है और अच्छा मार्केट होने के कारण भरपूर मुनाफा होता है। बकौल वकील प्रसाद, किसान जितनी भी किस्म उगाना चाहें, उपजा सकते हैं, लेकिन देवघर के बाजार में 3 किस्मों की भारी डिमांड है। इनमें गेंदा यानी मेरीगोल्ड (Marigold), जरबेरा (Gerbera) और ग्लेडियोलस (Gladiolus) के फूल शामिल हैं। बकौल वकील प्रसाद, बाबा बैद्यनाथ के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के बीच गेंदे के फूल का अधिक उपयोग किया जाता है। इसके अलावा अलग-अलग मंदिरों में जाने वाले श्रद्धालु भी गेंदे के फूल का बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं।

फूलों की खेती से आमदनी
वकील प्रसाद बताते हैं कि फूलों की खेती लगातार कई वर्षों तक की जा सकती है। जरबेरा की खेती अधिकांश ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस में की जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ फूल गर्मियों में उगाए जाते हैं जबकि रबी के सीजन में भी कई फूलों की खेती होती है। ऐसे में देवघर के किसानों को फूलों की खेती कर अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने कहा कि फूलों की खेती करने में विशेष आर्थिक निवेश की जरूरत नहीं पड़ती है फूलों में लगने वाली बीमारियों के बारे में भी ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि बुवाई के बाद फूलों की नियमित देखभाल करते रहें और पौधों की सिंचाई करते रहने पर अच्छा उत्पादन हासिल किया जा सकता है। नियमित उत्पादन आय का अच्छा स्रोत बन जाता है।

पांच वर्षों से फूलों की खेती कर रहे हैं वकील
बता दें कि फूलों की खेती को वैज्ञानिक भाषा में फ्लोरीकल्चर कहा जाता है। वकील प्रसाद पिछले पांच साल से फूलों की खेती कर रहे हैं। कृषि जागरण डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने शुरुआत में कोलकाता से बीज मंगाए। देवघर के किसानों ने सोचा कि स्थानीय स्तर पर फूल उगाए जाएं तो अच्छे पैसे कमाए जा सकते हैं। इसके बाद किसानों ने बड़े स्तर पर देवघर में फूलों की खेती की योजना बनाई। सरकारी अधिकारियों ने भी फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया। अब किसान अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं।

आम के बागवान वकील
बागवानी को हॉर्टिकल्चर कहा जाता है। फूलों के खेती के अलावा 10 साल पहले शुरू हुई राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission) के तहत वकील प्रसाद ने फलों का बगीचा भी लगाया है। 2008 में उन्होंने नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के तहत 200 से 250 पौधों की रोपाई की। पौधों के अच्छे रखरखाव के कारण वकील प्रसाद के पास वर्तमान में 400 से 500 आम के पेड़ हैं। बागवानी से अच्छी आमदनी की संभावना के बारे में वकील प्रसाद बताते हैं कि लोग उनके बागानों को देखने आते हैं। कम उपजाऊ जमीन पर फूलों की खेती के अलावा बागवानी युवाओं के लिए मिसाल बन रही है।

झारखंड सरकार की योजना से लाभ
वकील प्रसाद दूसरे किसानों को भी बागवानी में हाथ आजमाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनका कहना है कि खेती किसानी में कभी भी विफलता नहीं मिल सकती। निरंतर कोशिश करते रहने पर सफलता मिलती ही है। हॉर्टिकल्चर को प्रॉफिटेबल बिजनेस बताते हुए वकील प्रसाद कहते हैं कि झारखंड सरकार की ओर से बिरसा मुंडा बागवानी योजना (Birsa Munda Horticulture Scheme) चलाई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके तहत किसानों को बड़े पैमाने आम की बागवानी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों ने आम के पेड़ लगाने शुरू भी किए हैं। आम का औसत मूल्य 40 से 50 रुपये प्रति किलो मिलता है। गुणवत्ता के आधार पर कीमतें बढ़ती हैं।

खेती के अलावा मुर्गी और बत्तख पालन
खेती में मजदूरी के बारे में वकील प्रसाद बताते हैं कि उनके परिवार में 15 सदस्य हैं, ऐसे में उनकी मदद से काफी काम आसान हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों के अलावा मजदूरों से भी मदद लेनी पड़ती है। हर साल 4 से 5 मजदूर नियमित रूप से उनकी मदद करने आते हैं। वकील प्रसाद ने बताया कि उर्वरकों की दिक्कत से निजात पाने के लिए उन्होंने खुद ही वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन भी शुरू किया है। फलों और फूलों के उत्पादन के अलावा वकील प्रसाद बकरी पालन और बत्तख पालन भी करते हैं। अलग-अलग तरीकों से खुद को व्यस्त रखने और काम में चुनौती के बारे में वकील प्रसाद बताते हैं कि अगर आप सब कुछ अच्छे से मैनेज कर पाते हैं तो समस्या नहीं होगी। वकील प्रसाद किसान और कृषि से जुड़ने को इच्छुक युवाओं का मार्गदर्शन भी करते हैं उन्होंने बताया कि उनके साथ काम कर रहे लोगों ने ट्रेनिंग का भरपूर फायदा उठाया है और अब उन्हें बताने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

इजराइल की तकनीक अपनाने का प्लान
वकील प्रसाद को एक सरकारी योजना के तहत इजराइल में होने वाली खेती की तकनीक देखने का भी मौका मिला है। वे बताते हैं कि खेती के नए और प्रभावी तौर-तरीकों को देखने के बाद भी अपने खेतों में इसे लागू करने पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल, हो रही कमाई के बारे में वकील बताते हैं कि हर साल पांच से छह लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। शुरुआती परेशानियों के बारे में उन्होंने बताया, आम के पेड़ों में कुछ बीमारी लग गई थी। बारिश के साथ आंधी चलने के कारण बहुत आम बर्बाद हुए थे। उत्पादन घट गया था।
लागत घटाएं, मुनाफा बढ़ाएं
कृषिजागरण डॉटकॉम की रिपोर्ट में वकील ने किसानों को संदेश दिया और कहा, झारखंड के किसानों के सामने खेती के कई रास्ते हैं। कमाई के साथ स्टेबिलिटी भी हासिल की जा सकती है। जिन किसानों के पास जमीन नहीं भी है वे लोग मुर्गी पालन और मशरूम की खेती कर सकते हैं। डेयरी फार्म में संभावनाओं के बारे में वकील ने बताया, इससे आपको ना केवल शुद्ध दूध मिलेगा, बल्कि गाय के गोबर से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ती है। इसके अलावा गोमूत्र का उपयोग कीटनाशक बनाने में किया जाता है। वकील प्रसाद के मुताबिक सब्जियों के कचरे का उपयोग भी खाद बनाने में किया जा सकता है। ऐसे उपायों के साथ कई प्रकार की खेती एक साथ यानी इंटीग्रेटेड फार्मिंग से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।












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