एक स्टडी का दावा भारत में मॉनसून ने बदल लिए हैं अपने रंग ढंग

इस बीच एक ऐसी खबर भी आई है जिसके बाद परेशानी बढ़ना लाजिमी है।
मॉनसून का मौसम जो देश में 80 प्रतिशत बारिश के लिए जिम्मेदार है और जिस पर देश का कृषि क्षेत्र पूरी तरह से निर्भर है, अब उसमें बदलाव देखने को मिल रहा है।
एक नई स्टडी की मानें तो वर्ष 1980 से 2011 के बीच मॉनसून क औसत बारिश में गिरावट दर्ज की गई है।
यह स्टडी स्टैनफोर्ड वुड्स इंस्टीट्यूट फॉर एनवॉयरमेंट की ओर से कराई गई थी। हाल ही में इस स्टडी को नेचर क्लाइमेट चेंज नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
इस स्टडी में इस बात का भी जिक्र है कि भारत में हवा और नमी की वजह से भी मौसम कभी खुश्क को कभी शुष्क होत रहता है।
पिछले 60 वर्षों के दौरान देश में मॉनसून के दौरान बारिश पर नजर रखने के बाद अध्ययनकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि भारत के लोगों को आगे आने वाले दिनों में और गर्म मौसम का सामना करने को तैयार रहना चाहिए।
इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि भारत में मॉनसून के दौरान कर्इ परिवर्तन दर्ज होते हैं जिनमें देश बारिश और कम बारिश के अंतराल में होने वाले परिवर्तन भी खासे अहम है।
इन परिवर्तनों की वजह से मौसम कभी अत्यधिक शुष्क हो जाता है तो कभी एकदम सूखे के हालात पैदा हो जाते हैं। इन परिवर्तनों को सबसे ज्यादा असर खेतों, जल संसाधनों, इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव तंत्र पर पड़ता है।
स्टडी में यह बात भी कही गई है कि जुलाई से अगस्त के बीच होने वाली बारिश में खासी कमी आई है।
दक्षिण एशिया में वर्ष 1980 से अभी तक मॉनसून और बारिश के पैटर्न पर नजर रखने के लिए की गई इस स्टडी में कहा गया है कि भारत में आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी और मॉनसून पैटर्न में आई तब्दीली इसका साफ इशारा है।












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