सर्जिकल स्‍ट्राइक्‍स ने बढ़ाई पाक सेना और लश्‍कर में दूरी!

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इस्‍लामाबाद। पिछले दिनों खबरें आई थीं कि सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद पाकिस्‍तान की सरकार और वहां की सेना के बीच दूरियां आ गई हैं। ले‍किन भारत इस बार पर यकीन करने को तैयार नहीं है। भारत का मानना है कि पिछले दिनों जो भी खबर आई वह सिर्फ इसलिए थी क्‍योंकि पाकिस्‍तान पर दुनिया के चारों ओर से आतंकियों को पनाह देने की वजह से विरोध झेलना पड़ा है।

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लश्‍कर और सेना के बीच दूरी

वहीं दूसरी ओर भारतीय अधिकारी मानते हैं और उन्‍होंने इस बात की पुष्टि भी की है कि सर्जिकल स्‍ट्राइक्‍स के बाद आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा और मिलिट्री में दूरियां जरूर आ गई हैं।

इस सर्जिकल स्‍ट्राइक में सबसे ज्‍यादा नुकसान लश्‍कर-ए-तैयबा को ही हुआ थ। कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो लश्‍कर ने करीब 30 आतंकियों को इस स्‍ट्राइक में खो दिया था।

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आईएसआई से भी नाराज लश्‍कर

लश्‍कर का मानना है कि पाक सेना ने सर्जिकल स्‍ट्राइक्‍स में उसके लड़ाकों को बचाने के लिए कुछ नहीं किया और उन्‍हें दफनाने में भी दोयम दर्जे का रवैया अपनाया।

आईएसआई भी लश्‍कर की हर गतिविधि पर करीब से नजर रखे हुए है। इस संगठन का नियंत्रण से बाहर होना पाक के लिए बुरी खबर में तब्‍दील हो सकता है।

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लश्‍कर को मनाने की कोशिशें जारी

आईएसआई सारी कोशिशें कर रही है ताकि यह संगठन नियंत्रित रहे लेकिन आईएसआई अगर लश्‍कर को खुश नहीं रख पाया तो फिर भारत की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। 26/11 हमलों से पहले भी लश्‍कर के अंदर कई तरह का विरोध पनप रहा था।

इसके कई आतंकी अफगानिस्‍तान जाना चाहते थे और अमेरिका के खिलाफ युद्ध छेड़ने को बेकरार थे। लेकिन आईएसआई ने उन्‍हें ऐसा करने से रोक दिया था। इसके बाद ही आईएसआई ने 26/11 की साजिश को अंजाम दिया।

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हाफिद सईद पहुंचा सेना के कैंप में

इंटेलीजेंस ब्‍यूरों (आईबी) के अधिकारियों की मानें तो आईएसआई कोई बड़ी साजिश कर सकती है ताकि लश्‍कर के आतंकी एकजुट रहें। सेना भी सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद पाक मिलिट्री में डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है।

सेना की ओर से पीओके में मौजूद लश्‍कर के कैंप्‍स को हटाना इसका सुबूत है। वहीं इसके चीफ यानी हाफिज सईद को भी सेना के कैंप में भेज दिया गया है ताकि सर्जिकल स्‍ट्राइक में उसे कोई नुकसान न होने पाए।

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English summary
Indian officials do confirm that there has been a rift between the Lashkar-e-Taiba and the military following the surgical strikes.
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