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फिलिप ह्यूज: 27 नवंबर को मौत, 30 को था जन्मदिन

सिडनी। आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिलिप ह्यूज इस तरह से दुनिया को अलविदा कह जायेंगे इस बात की कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। मात्र 25 साल की उम्र में क्रिकेट में अपना लोहा मनवाने वाले फिलिप ह्यूज का तीस नवंबर को जन्मदिन था।

और शायद उनके जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए ही आस्ट्रेलिया क्रिकेट समिति की ओर से भारत-आस्ट्रेलिया सीरीज के खिलाड़ियों की घोषणा नहीं की गई थी क्योंकि समिति 30 नवंबर को टीम का ऐलान करने वाली थी जिसमें वो फिलिप को टीम में शामिल करके उन्हें जन्मदिन का तोहफा देने वाली थी।

मौत के बाउंसर ने छीना फिलिफ से 30 नवंबर के जन्मदिन का जश्न

कहा जा रहा था कि क्लार्क की जगह 25 साल के नौजवान फिलिप को मिल सकती है, लेकिन किसे मालूम था कि मौत का बाउंसर फिलिप को दुनिया से ही ले जायेगा। क्रिकेट के मैदान में खिलाड़ियों को चोट लगना तो आम बात है, लारा, तेंदुलकर, कुंबले जैसे सभी महान खिलाड़ी गंभीर चोटों से दो चार हो चुके हैं लेकिन कोई चोट किसी को दुनिया से रूखसत कर सकती है यह किसी ने कभी नहीं सोचा था।

मात्र 25 साल के फिलिप ने बेहद ही छोटे अपने क्रिकेट करियर में वो धमाल मचा दिया था जिससे उनकी तुलना क्रिकेट के महानतम खिलाड़ी सर डॉन ब्रैडमैन से होने लगी थी। ह्यूज ने 26 टेस्ट और 25 अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय मैचों में आस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया था। टेस्ट मैचों में उन्होंने तीन जबकि एकदिवसीय में दो शतक लगाए।

ह्यूज ने 26 टेस्ट और 25 अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय मैंच खेले थे

अपने पहले मैच में ही उन्होंने शतक लगाया था। न्यू साउथ वेल्स के अग्रणी रन स्कोरर ह्यूज के नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 26 शतक हैं। साल 2009 में फिलिप ने अपने करियर की शुरूआत की थी। इंटरनेशनल टेस्ट में उनका सर्वाधिक स्कोर 160 और वनडे इंटरनेशनल में उनका सर्वाधिक स्कोर 138 था।

काश फिलिप ने ना खेला होता मौत का बाउंसर

मालूम हो कि घरेलू मैच के दौरान बल्लेबाजी करते हुए सर में गेंद लगने से घायल हुए ह्यूज का इलाज के दौरान अस्पताल में गुरुवार को निधन हो गया। सीन एबॉट की बाउंसर गेंद ह्यूज के हेलमेट के नीचे से उनके सिर में लगी, जिससे उनकी खोपड़ी में फ्रैक्चर हो गया और मस्तिष्क की नस फट गई। चोट लगने के कुछ ही सेकंड के अंदर ह्यूज वहीं पिच पर गिर गए और उसके बाद मौत होने तक होश में नहीं आ सके।

बाउंसर गेंद ह्यूज के हेलमेट के नीचे से उनके सर में लगी

ह्यूज को सेंट विसेंट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा गया था। ह्यूज के मस्तिष्क का ऑपरेशन किया गया और बुधवार को उनके सिर का स्कैन भी हुआ था। मंगलवार को चोटिल होने के बाद वह (ह्यूज) होश में नहीं आए। मौत से पहले ह्यूज को किसी तरह का कष्ट नहीं था और उनके परिवार के सदस्य एवं निकट मित्र उनके पास ही थे।"

मौत कब आयेगी, कैसे आयेगी, किसे पता है

कहते हैं ना जिंदगी के लिए तो सभी रोते हैं लेकिन मौत कब आयेगी, कैसे आयेगी, किसे पता है। 26 नवंबर, 2009 को ह्यूज शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट के साउथ आस्ट्रेलिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर जब अपना मैच खेल रहे थे तो आखिरी मौत का बाउंसर खेलने से पहले उनके जेहन में भी नहीं आया होगा कि यह मैदान, यह पिच और उनकी ओर से लगाया गया शॉट सब कुछ आखिरी है और वो दुनिया को, अपने फैंस को, अपने परिवार को छोड़कर दूर बहुत दूर जाने वाले हैं, कभी भी वापस ना आने के लिए...।

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