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ग्लोबल वार्मिंग कारण 22वीं सदी में विलुप्त हो जाएंगे ये सभी देश

वैज्ञानिकों के मुताबिक जिस रफ्तार के साथ समुद्र का जल स्तर बढ़ता रहा है, 22वीं सदी आते-आते कई देश पानी में पूरी तरह डूब सकते हैं।
sanjay jha
ग्लोबल वार्मिंग के कारण समंदर का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। 20वीं शताब्दी में समंदर का जलस्तर 1.4 मिमी बढ़ा था। वैज्ञानिकों के मुताबिक 2006 से 2015 तक समंदर का स्तर 3.6 मिमी हो चुका है।
जिस रफ्तार से यह बढ़ रहा है 2100 तक यह 16 से 25 इंच तक बढ़ जाएगा, जिससे पूरी दुनिया में तबाही आ जाएगी। जलआपदा के कारण कई देशों का पूरी तरह से नामोनिशान मिट जाएगा। वे देश जिनके डूब जाने का है खतरा।
मालदीव पर्यटकों के लिए बेहद चर्चित देश है। यह पृथ्वी पर का सबसे सपाट देश है। इसकी औसत ऊंचाई 3 फीट है। जिस रफ्तार से समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, मालदीव 2100 तक अपने भूमि क्षेत्र का लगभग 77% गंवा देगा।
मालदीव जैसा ही एक और देश है किरिबाती। यह देश समुद्र तल से लगभग 6 फीट ऊपर है। अगर समुद्र का स्तर 3 फीट तक बढ़ जाता है, तो वह अपनी दो-तिहाई भूमि खो सकता है।
पलाऊ भी समुद्र में डूबने की कगार पर खड़ा द्वीप है। यहां के समुद्र का पानी हर साल लगभग 0.35 इंच ऊपर आ रहा है।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका का बड़ा हिस्सा साल 2050 तक पानी में डूब जाएगा। जलवायु परिवर्तन के चलते वातावरण के तापमान में बढ़ोत्तरी होने से देश के 70% से अधिक हिस्से को विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।
बैंकॉक हर साल 1 सेमी पानी में डूब रहा है। आसान शब्दों में कहें तो जलस्तर बढ़ रहा है। इससे आने वाले समय में बैंकाक के पानी में डूबने की संभावना प्रबल है। जलवायु परिवर्तन के चलते बैंकाक को विषम परिस्थिति से गुजरना पड़ रहा है।
जलवायु परिवर्तन के चलते दुनिया के सबसे खूबसूरत शहर में हर साल चार बार बाढ़ आती है। जानकारों की मानें तो वेनिस में समुद्र स्तर प्रतिवर्ष 1 मिलीमीटर बढ़ता है। इसके लिए वेनिस भी ग्लोबल वार्मिंग के चलते डूबने के कगार पर है।
वियतनाम का शहर हो ची मिन्ह सिटी पूरी तरह से समतल है। ऐसे में मेकॉन्ग डेल्टा का लगातार बढ़ रहा जलस्तर इसके लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों को आशंका है कि हो ची मिन्ह सिटी साल 2030 तक पानी के अंदर डूब जाएगा।