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नार्को टेस्ट क्या होता है, अपराधिक मामलों में कैसे की जाती हैं जांच

अपराधिक मामलों का खुलासा करने के लिए मेडिकल टीम द्वारा नार्को टेस्ट किया जाता है। इस नार्को टेस्ट से अपराधी या संदिग्ध से सच उगलवाने का प्रयास किया जाता है। तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या और कैसे होता है नार्को टेस्ट
DEEPAK SAXENA
अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति से सच उगलवाने के लिए व्यक्ति को ट्रूथ ड्रग नाम से आने वाली एक साइकोएक्टिव दवा या फिर सोडियम पेंटोथोल का इंजेक्शन दिया जाता है।
दवा के खून में पहुंचने के बाद व्यक्ति अर्धचेतना में पहुंच जाता है। अब उस व्यक्ति से टीम अपने पैटर्न से सवाल पूछती हैं।
ये टेस्ट फॉरेंसिक एक्सपर्ट, जांच अधिकारी, मनोवैज्ञानिक एक साथ मिलकर करते हैं।
अर्ध चेतना अवस्था में व्यक्ति के अंदर तर्क क्षमता या सच झूठ को छिपाने की शक्ति नहीं रह जाती है, जिससे उससे सच उगलवाने की गुंजाइश बढ़ जाती है।
सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी को नार्को टेस्ट के लिए कोर्ट से अनुमति लेना जरूरी होता है।
व्यक्ति की सेहत , उम्र और जेंडर के आधार पर ही नार्को टेस्ट किया जाता है। साथ ही ये टेस्ट काफी सावधानी पूर्वक किया जाता है।