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यूपी चुनाव के सातवें चरण में इन दिग्गजों की साख दांव पर

यूपी विधानसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के मतदान में  जिन दिग्गज उम्मीदवारों की साख दांव पर है उनके साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक ताकत की भी परीक्षा इसी चरण में होगी।
दारा सिंह चौहान
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे दारा सिंह चौहान चुनाव से पहले सपा में चले गए और उनको घोसी से टिकट मिला है। भाजपा ने घोसी सीट से उपचुनाव में जीते विजय राजभर को टिकट दिया है। बसपा से वसीम इकबाल और कांग्रेस से प्रियंका यादव मैदान में हैं।
अनिल राजभर
पूर्वांचल में इस बार सपा के साथ ओपी राजभर हैं तो भाजपा ने भी अपने पाले में राजभर नेता रखे हैं जिनमें से कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर खास हैं जो शिवपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ ओम प्रकाश राजभर ने अपने बेटे अरविंद राजभर को मैदान में उतारा है।
रविंद्र जायसवाल
योगी सरकार में राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल वाराणसी उत्तरी सीट से तीसरी बार कमल खिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस बार उनकी कांटे की टक्कर सपा प्रत्याशी अशफाक अहमद से है।
नीलकंठ तिवारी
33 साल से वाराणसी दक्षिणी सीट पर भाजपा अजेय है लेकिन साल 2022 के चुनाव में योगी के मंत्री नीलकंठ तिवारी के लिए राह आसान नहीं। इसलिए भी नीलकंठ तिवारी ने वीडियो जारी कर जनता से माफी मांगी है। सपा के कामेश्वर सिंह इस बार टक्कर दे रहे हैं।
गिरीश यादव
जौनपुर सीट से योगी सरकार में मंत्री गिरीश यादव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। सपा ने अरशद खान को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर पूर्व विधायक नदीम जावेद हैं। यादव और मुस्लिम मतदाता ही इस सीट पर जीत-हार तय करते हैं।
रमाशंकर सिंह पटेल
मिर्जापुर क्षेत्र की मड़िहान सीट पर पटेल मतदाता ज्यादा संख्या में हैं। योगी सरकार के मंत्री रमाशंकर पटेल एक बार फिर मड़िहान सीट से मैदान में हैं। उनको टक्कर देने के लिए सपा ने रविंद्र बहादुर सिंह पटेल को उतारा है।
दुर्गा प्रसाद यादव
आजमगढ़ सीट से आठ बार जीतने वाले दुर्गा प्रसाद यादव सपा के अभेद्य किले से प्रत्याशी हैं और नौवीं बार उनको विधानसभा में जाने से रोकने के लिए भाजपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी और बसपा ने ठाकुर प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। आजमगढ़ से ही अखिलेश सांसद हैं।
शैलेंद्र यादव ललई
जौनपुर की शाहगंज सीट से शैलेंद्र यादव ललई तीसरी बार विधायक बनने के लिए सपा प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं। शैलेंद्र यादव ललई से मुकाबले के लिए भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी ने रमेश सिंह और बसपा ने इंद्रदेव यादव को टिकट दिया है।
विजय मिश्रा
ज्ञानपुर से विधायक बाहुबली विजय मिश्रा जेल में हैं और इस बार प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव में उतरे हैं। उनके लिए पत्नी और बेटी ने चुनाव प्रचार किया। विजय मिश्रा इस सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं।
ओमप्रकाश राजभर
सुभासपा इस बार सपा के साथ है और इसके मुखिया गाजीपुर के जहूराबाद सीट से चुनाव मैदान में है। सातवें चरण की सीटों में से ही तीन सीटों पर सुभासपा ने भाजपा के साथ मिलकर 2017 में कब्जा जमाया था। ओमप्रकाश राजभर की साख दांव पर है।
धनंजय सिंह
जौनपुर की मल्हनी सीट से बाहुबली धनंजय सिंह जदयू उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। इस सीट पर होने वाले जीत-हार पर सबकी नजर रहेगी। सपा प्रत्याशी और अभी के विधायक लकी यादव के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल है।
अब्बास अंसारी
माफिया मुख्तार अंसारी ने मऊ सीट की विरासत बेटे को सौंप दी है। इस बार अब्बास अंसारी सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्तार के गढ़ को बचाने की चुनौती अब अब्बास अंसारी के सामने है।
सातवें और अंतिम चरण के चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। वाराणसी की आठों सीटों पर फिर से भाजपा को जादुई जीत नहीं मिली तो इसका सीधा असर मोदी की राजनीतिक हैसियत पर पड़ेगा। मिर्जापुर में अनुप्रिया पटेल की भी साख दांव पर है।