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रतन टाटा से जुड़ी वो बातें, जो उन्हें भारत का 'रत्न' बनाती हैं

हिंदी न आते हुए भी अपनी थरथराती आवाज में टूटी-फूटी हिंदी बोलकर रतन टाटा देश का दिल जीत लिया। जानें रतन टाटा से जुड़ी अनसुनी बातें
रतन टाटा का जन्म 1937 में हुआ। टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के दत्तक पोते नवल टाटा के बेटे हैं।
1961 में टाटा ग्रुप से करियर शुरू किया, उन्होंने बतौर मैनेजिंग ऑपरेटर ज्वाइन किया। साल 1991 में इसी कंपनी के चेयरमैन भी बने। साल 2012 में वो रिटायर हुए थे।
1991 में में टाटा समूह के चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने अपने बिजनेस स्किल के जरिए 21 साल में टाटा समूह के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
टाटा की लव लाइफ भी काफी दिलचस्प रही है। उन्हें जिंदगी में चार बार प्यार हुआ, लेकिन शादी नहीं हो पाई।
रतन टाटा बुक लवर हैं। उन्हें लोगों की सक्सेस स्टोरीज पढ़ना बहुत पसंद है। रतन टाटा को फ्लाइट्स उड़ाना बहुत पसंद है।
वह एक कुशल पायलट हैं। रतन टाटा 2007 में F-16 फाल्कन उड़ाने वाले पहले भारतीय थे।
रतन टाटा को कुत्तों से बहुत लगाव है। उनके दो पालतू डॉग्स का नाम टीटो और मैक्सिमम है।
रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप में 40 गुना ग्रोथ किया। कंपनी को 50 गुना प्रॉफिट हुआ। जो कंपनी साल 1991 में 5.7 बिलियन डॉलर की थी, वो 2016 में 103 बिलियन डॉलर की हो गई।
रतन टाटा को 2000 में पद्मभूषण और 2008 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।
साल 2009 में रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा मोटर्स ने दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो डिजाइन और लॉन्च किया। 1 लाख की लखटकिया कार को लॉन्च कर उन्होंने अपना वादा पूरा किया।