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पुंगनूरः ढाई फीट की दुर्लभ गाय, जिसके दूध में गजब की ताकत है

पुंगनूर गाय दुनिया की सबसे छोटी नस्ल की सुंदर गाय है। यह महज दो से ढाई फीट ऊंची होती है। भारतीय देशी नस्ल की यह गाय 3 से 5 लीटर तक दूध देती है। इसे पुंगनूर के अलावा पुंगानूर, पुंगानुरु नाम से भी बुलाया जाता है।
Chaitanya Das Soni
देश में आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पुंगनूरु इलाके में पाई जाने वाली छोटी हाइट की गाय को पुंगनूर या पुंगनुरु नाम मिला है। यह दुर्लभ नस्ल की विलुप्ती की कगार पर है। यह अपने छोटे कद के लिए प्रसिद्ध है।
पुंगनूर गाय को तकनीकि रुप से या पशु विशेषज्ञ ड्वार्क काउ के नाम से जानते हैं। हालांकि पुंगनूर इसका सबसे प्रचलित नाम है। यह मूल रुप से आंध्रप्रदेश की छोटी नस्ल की गाय है। इसकी कीमत 1 लाख से 2.5 लाख तक होती है।
दुनिया में आंध्रप्रदेश की पुंगनूर व केरल की वेचर प्रजाति की गाय दुनिया की सबसे छोटी नस्ल की गाय है। दोनों दुधारु हैं, लेकिन इन दोनों में भी पुंगनूर सबसे छोटी गाय व दुर्लभ प्रजाति की गाय के रुप में दर्ज है।
पुंगनूर गाय को आंध्र प्रदेश में सनातनी परंपरा से जोड़कर भी पहचाना जाता हैं। धर्मग्रंथों के जानकार व यहां के स्थानीय लोग पुंगनूर को लेकर बताते हैं कि प्राचीन समय में ऋषिमुनी इस गाय को पालते थे।
आंध्र प्रदेश की यह दुर्लभ प्रजाति की पुंगनूर गाय देश के कई अन्य प्रदेशों में भी आसानी से सर्वाइव कर लेती है। यह गाय मप्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक यहां तक की राजस्थान व पहाड़ी प्रदेशों में भी पाली जा रही है।
आंध्रप्रदेश के गोदावरी जिले के लिंगमपट्टी गांव में निजी तौर पर एक गो-शाला संचालित हो रही है। यहां केवल पुंगनूर गाय को ही संरक्षित किया जा रहा है। गो-शाला में छोटी-बड़ी गायों को मिलकर करीब 350 से अधिक गाय मौजूद हैं।
पुंगनूर गो-शाला को आंध्र के स्थानीय निवासी व गो-सेवक कृष्णम राजू ने करीब 18 साल पहले प्रारंभ किया था। पहले एक गाय लाए थे। दुर्लभ नस्ल की गाय का कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से संरक्षण किया है।
शरीर की हाईट और आकर्षक कद-काठी के कारण बहुत ही सुंदर और मासूम सी इस गाय की प्रजाति पर विदेशी नस्लों की ज्यादा दूध देने वाली गाय के कारण संकट बना है। लोग जर्सी, हॉलिस्टन, मारवाड़ी, साहिवाल व अन्य गायो को ज्यादा पालते है।
दुर्लभ व बेहद क्यूट दिखने वाली पुंगनूर गाय के दूध में बसा की मात्रा ज्यादा होती है। इसमें बसा का प्रतिशत 8 तक होता है, जो आम गाय के दूध से दोगुने से अधिक है।
पुंगनूर नस्ल की गाय का दूघ औषधिय गुणों से भरपूर बताया जाता है। यदि इसका घी बनाया जाता है, तो वह अन्य नस्ल की गायों के दूध की अपेक्षा ज्यादा और पीले रंग का होता है। यह ज्यादा पौष्टिक भी होता है।