Tap to Read ➤

उत्तराखंड में किसकी बनेगी सरकार, क्या टूटेंगे ये 4 मिथक

उत्तराखंड में सरकार किसकी बनेगी ये 10 मार्च को तय हो जाएगा, लेकिन सबकी निगाहें 4 बड़े मिथकों पर टिकी हुई हैं। जो हमेशा से ही प्रदेश में सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं।
जो भी पार्टी गंगोत्री विधानसभा सीट जीतती है, उसकी बनती है सरकार। उत्तराखंड बनने के बाद ये मिथक टूटा नहीं है। 2002 और 2012 में कांग्रेस यहां से जीती और सरकार बनाई, इसी तरह 2007 और 2017 में भाजपा जीती और सत्ता तक पहुंची।
कुमाऊं की रानीखेत सीट पर जिस दल का विधायक जीतकर आया वो हमेशा विपक्ष में ही बैठा है। इस सीट पर 2002 और 2012 में भाजपा जबकि 2007 और 2017 में कांग्रेस जीतकर आई। इस तरह दोनों बार जीतने वाली पार्टी को विपक्ष में बैठना पड़ा है।
यहां कोई भी सीएम रहते चुनाव नहीं जीत पाया। 2002 में एनडी सीएम रहे, उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। 2007 में बीसी खंडूरी सीएम बने वे 2012 में हार गए। 2012 में पहले विजय बहुगुणा सीएम बने उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। हरीश रावत दो जगह से चुनाव हारे। 2017 में पहले त्रिवेंद्र फिर तीरथ सीएम बने, दोनों मैदान से बाहर हैं। अब निगाहें तीसरे सीएम धामी पर हैं।
उत्तराखंड में कोई शिक्षा मंत्री दोबारा नहीं जीता। 2002 में भाजपा की अंतरिम सरकार में तीरथ सिंह रावत शिक्षा मंत्री रहे, 2002 में पहली निर्वाचित कांग्रेस सरकार में नरेंद्र भंडारी, 2007 में गोविंद सिंह बिष्ट और खजान दास शिक्षा मंत्री बने, 2012 की कांग्रेस सरकार में मंत्री प्रसाद नैथानी शिक्षा मंत्री रहे ये सब अपने चुनाव हारे हैं।