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इन स्लीपिंग पोजीशन में आते हैं डरावने सपने, जानिए क्यों?

आप जिस तरह या जिस पोजीशन में सोते हैं उसका आपके सपनों से एक अजीब संबंध हो सकता है।
अध्ययन बताते हैं कि हमारे सपने, हमारी नींद और तनाव समेत कई कारकों से प्रभावित होते हैं।
सोने के समय सीने पर हाथ रखने और सपनों का एक अलौकिक संबंध हैं। सबसे ज्यादा बुरे सपने ऐसी ही पोजीशन में आते हैं।
कहा जाता है कि सीने पर हाथ रखकर सोने से शरीर पर तनाव पड़ता है। सोते समय हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क बेहद ही न्यूनतम स्तर पर काम करते हैं। ऐसे में उन्हें हल्का सा भी तनाव परेशान कर सकता है।
सोते समय हाथ को सीने पर रखने से शरीर पर भार पड़ता है ऐसे में मस्तिष्क इसे पढ़ने की कोशिश करता है। दिमाग की यह क्रिया सपनों पर असर डालती है।
तनाव बढ़ने से मस्तिष्क के उस हिस्से में, जहां हमारी यादें संग्रहीत होती हैं, ऑक्सीजन की पहुंच बाधित होती है। हमारा अवचेतन एक तरह से यहां अलार्म सेट कर देता है।
अवचेतन का अलार्म संकेत मिलते ही दिमाग हमें नकारात्मक इमेजरी या बुरे सपने के माध्यम से सचेत करने की कोशिश करता है। अक्सर बुरे सपने के बाद हम जाग जाते हैं।
अध्ययन बताते हैं कि आपकी सोने की पोजीशन या जगह को बदलने से आपके देखे जाने वाले सपनों पर असर पड़ सकता है।
नींद की अलग-अलग स्थिति आपके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कुछ दबाव पैदा कर सकती है और आपके सपनों में परिवर्तन पैदा कर सकती है।
कोई भी नींद की पोजीशन नहीं हो जो आपको सबसे अच्छे सपनों की गारंटी देती है या बुरे सपने को दूर रखती है।
ये याद रखना जरूरी है कि सपनों का सबसे ज्यादा संबंध आपके सोचने, दिमाग पर तनाव देने से ही है।
ऐसी चीजें न देखें जिसे सोचकर मस्तिष्क काफी देर तक सोचता रहे। जैसे डरावनी फिल्में या जासूसी चीजें। सोने से पहले अच्छा सा पसंदीदा पेय लें और फिर सोने जाएं।
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