Tap to Read ➤

भगवान राम से जुड़े रोचक तथ्‍य, जिनके बारे में जानकर होगी हैरानी

रामनवमी पर जानिए मर्यादा पुरुषोत्‍तम से संबंधित अनसुनी बातें
भगवान राम को 10 अवतारों में भगवान विष्णु का 7वां अवतार माना जाता है।
भगवान राम से पहले, भगवान विष्णु मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुआ), वराह (सूअर), नरसिंह (आदमी और शेर), वामन (बौना), और बाद में परशुराम , कृष्ण, बुद्ध और कल्कि अवतार में आए।
भगवान राम को मानव रूप में सबसे पुराने देवता के रूप में जाना जाता है। भगवान राम का जन्म त्रेता युग जो आज से 1,296,000 साल पहले समाप्त हो गया था उसमें हुआ था।
त्रेत्रा युग में भगवान विष्णु ने वामन और परशुराम के रूप में अवतार लिया था।
भगवान राम का जन्म "इक्ष्वाकु" वंश में हुआ था, इसकी स्थापना भगवान सूर्य के पुत्र "राजा इक्ष्वाकु" ने की थी। इसलिए भगवान राम  "सूर्यवंशी" कहलाते है।
विष्णु सहस्रनाम ध‍ार्मिक पुस्तक में भगवान विष्णु के एक हजार नामों की सूची है।
विष्णु सहस्रनाम की सूची के अनुसार "राम" भगवान विष्णु का 394वां नाम है।
भगवान राम का नाम रघुवंशी के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने रखा था। "राम" शब्द दो बीजाणुओं (बीजाक्षरा), "अग्नि बीज" और "अमृत बीज" से मिलकर बना है।
"राम" अक्षर मन, शरीर और आत्मा को शक्ति प्रदान करते हैं।
राम नाम का तीन बार उच्चारण हजारों देवताओं को स्मरण करने के बराबर है, जिसका वर्णन महाभारत में भी   है।
भगवान शिव ने कहा था कि तीन बार राम नाम का जाप करने से हजार देवताओं के नामों का उच्चारण करने के बराबर कृपा मिलती है।
राम सेतु का निर्माण वानर सेना द्वारा किया गया था, जो तमिलनाडु में रामेश्वरम से शुरू होकर श्रीलंका में मन्नार तक था।
रामसेतु  पुल के मुख्य शिल्पकार "नल" और "नील" थे। इस ब्रिज की लंबाई करीब 30 किमी थी और इसे 6 दिन में बनाया गया था।
भगवान राम ने ग्यारह हजार वर्षों तक अयोध्या राज्य पर शासन किया। इस स्‍वर्णिम काल  को "राम राज्य" कहा जाता है।
कहा जाता है जब सीता मइया ने पृथ्वी में समा गई और शरीर त्याग दिया, तब भगवान राम ने सरयू नदी में जल समाधि लेकर पृथ्वी का त्याग कर दिया।
भगवान राम ने हमारे लिए सही मार्ग के आदर्श प्रस्तुत किए हैं। रामनवमी उन सभी चीजों को याद करने और जीवन में अपनाने का दिन है।