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ॐ आकार के पर्वत पर विराजे हैं शिव, ऐसा है omkareshwar का पौराणिक महत्व

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में ओमकारेश्वर नामक स्थान है, जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है। ओम आकार के पर्वत पर विराजमान ज्योतिर्लिंग का धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है।
Naman Matke
खंडवा जिले में नर्मदा नदी के किनारे ओंकार नामक पर्वत पर स्थापित ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु ओमकारेश्वर पहुंचते हैं।
ओमकारेश्वर में 2 ज्योतिर्लिंग स्थापित है, जहां एक ज्योतिर्लिंग को ममलेश्वर के रूप में पूजा जाता है, तो वहीं दूसरे ज्योतिर्लिंग को ओमकारेश्वर के रूप में पूजा जाता है।
शयन आरती के बाद यहां चौसर-पांसे बिछा दिए जाते हैं, जहां मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती यहां रात्रि को चौसर-पांसे खेलते हैं।
मान्यता है कि, राजा मांधाता की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव यहां ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए, तभी से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी है। सावन माह में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है।
महाकाल लोक के बाद अब ओमकारेश्वर को संवारने की तैयारी सरकार की ओर से की जा रही है, जहां इसे लेकर अब जल्द ही विकास कार्यों का सिलसिला शुरू होगा।
केंद्र और राज्य के साथ ही सीएसआर फंड और साधु-संतों के सहयोग से लगभग 2200 करोड़ रुपए के विकासकार्य यहां किए जाएंगे।
ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग खंडवा जिले में स्थापित है, जो इंदौर से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर यह स्थल श्रद्धालुओं को आनंद की अनुभूति कराता है।
इंदौर या खंडवा से सड़क मार्ग के जरिए ओमकारेश्वर तक पहुंचा जा सकता है, इंदौर और खंडवा दोनों ही शहरों से यहां पहुंचने के लिए परिवहन के तमाम साधन उपलब्ध है।
ओमकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यहां रुकने की व्यवस्था भी काफी अच्छी है, जहां अलग-अलग आश्रमों और होटलों में श्रद्धालुओं को रुकाया जाता है।