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Monkeypox: दुनिया के सामने एक और वायरस का संकट, क्या हैं लक्षण?
कोरोना से जूझ रही दुनिया के सामने एक नए वायरस की चुनौती खड़ी है, जिसके बारे में साइंटिस्ट चिंता जता रहे हैं।
Rajeev Singh
कोरोना के बाद अब मंकीपॉक्स, जो फिलहाल कम से कम 12 देशों में फैल चुका है।
दुनियाभर में मंकीपॉक्स के 80 से ज्यादा केस मिल चुके हैं।
मंकीपॉक्स नाम क्यों? 1958 में सबसे पहले यह वायरस बंदरों में ही मिला था।
मंकीपॉक्स का वायरस स्मॉलपॉक्स (चेचक) के वायरस जैसा होता है। दोनों में बहुत समानता है।
इसके लक्षण हैं- सिरदर्द, सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, बुखार के साथ पूरे शरीर पर रैश और दाने।
यह बीमारी दो से तीन सप्ताह में खुद ब खुद ठीक हो जाती है। चेचक से कम खतरनाक है।
यह कोराना जितना संक्रामक नहीं है। बहुत नजदीकी संपर्क से फैलता है।
इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए स्मॉलपॉक्स का टीका लगाया जाता है।
सवाल ये कि फिर मंकीपॉक्स से दुनियाभर में चिंता क्यों है? भारत भी सतर्कता से जांच कर रहा है।
पहले यह बीमारी वेस्ट और सेंट्रल अफ्रीका तक सीमित थी। लेकिन इस बार यह 12 देशों में है।
यह अभी तक पता नहीं चल पाया है कि मंकीपॉक्स का कोई नया स्ट्रेन तो नहीं फैल रहा।
यह वायरस ऐसे देशों में फैल रहा है जहां यह पहले था ही नहीं, यही विश्व स्वास्थ्य संगठन की भी चिंता है।