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दुनिया का एकमात्र मंदिर, जहां होती है माता कौशल्या की पूजा

माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के 12 साल छत्तीसगढ़ में बिताये थे,लेकिन एक मान्यता यह भी है कि उनकी माता कौशल्या का मायके भी छत्तीसगढ़ में ही है।
dhirendra giri goswami
छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल कहा जाता है। यहां भगवान श्रीराम की पूजा भांजे के रूप में की जाती है।
रायपुर से थोड़ी दूर पर ग्राम चंदखुरी स्थित है। इसका नाम चंद्रवंशी राजाओं के नाम से रखा गया था।
चंदखुरी के प्राचीन माता कौशल्या  मंदिर में भगवान श्रीराम को गोद में लिए हुए माता कौशल्या की सुंदर प्रतिमा स्थापित है।
यह विश्व में  माता कौशल्या का इकलौता  मंदिर है। यहां माता कौशल्या और भगवान राम के एकसाथ दर्शन होते हैं।
किवदंती है कि राजा भानुमंत ने बेटी कौशल्या को विवाह में भेंटस्वरूप 10 हजार गांव दिए थे। इनमे चंद्रपुरी यानि चंदखुरी भी शामिल था।
चंदखुरी गांव को भगवान श्रीराम की माता कौशल्या का जन्मस्थान माना जाता है। कहते हैं कि अपने बचपन में श्रीराम अक्सर आया करते थे।
माता कौशल्या मंदिर के निकट सुखैन वैद्य जी की समाधी भी है। रामायण में ज़िक्र है कि सुखैन वैद्य  ने ही संजीवनी बूटी से लक्ष्मण जी का इलाज करके उनकी प्राण रक्षा की थी।
छत्तीसगढ़ सरकार ने चंदखुरी को राम पथ गमन योजना के तहत महत्त्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल घोषित कर रखा है। मंदिर परिसर में भगवान राम की 51 फुट ऊंची विशाल मूर्ति स्थापित की गई है।
दीपावली पर्व पर हर साल चंदखुरी में भी भव्य उत्सव आयोजित होता है।भक्त प्रभु श्रीराम की लंका पर विजय और अयोध्या वापसी का उत्सव मनाते हैं।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर शहर से चंदखुरी की दूरी 27 किलोमीटर है। देश के सभी शहरों से रायपुर रेल, सड़क और वायु मार्ग से बेहतर तरह जुड़ा हुआ है। आप आसानी से बस, टैक्सी या अन्य माध्यमों से चंदखुरी पहुंच सकते हैं।