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क्या है 'पेसा कानून' एमपी सरकार ने इसे क्यों लागू किया ?

2023 विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए शिवराज सरकार आदिवासियों के लिए पेसा एक्ट लागू किया है। आइए आपको बताते हैं कि राज्य में "पेसा एक्ट" लागू होने के बाद आदिवासियों को क्या फायदा होगा?
laxmi narayan malviya
पेसा कानून देश में 24 दिसंबर 1996 को लागू हुआ था। पेसा एक्ट (PESA ACT) का फुल फॉर्म पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूलेड एरियाज
पेसा कानून एक्ट को मध्य प्रदेश के जनप्रतिनिधि दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में बनाई गई समिति की अनुशंसा पर तैयार किया गया था।
पंचायती राज व्यवस्था को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू नहीं की जा सकती थी। क्योंकि जनजाति क्षेत्रों की परिस्थितियां भिन्न थीं, इसीलिए पेसा एक्ट को तैयार किया गया।
क्या है 'पेसा कानून' ? '
पेसा एक्ट (पेसा कानून)' आदिवासी क्षेत्र में ग्राम सभाओं को ये अधिकार देता है कि वे अपनी पसंद की योजनाओं को मंजूरी दे सकते हैं।
पेसा कानून प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को स्वीकार करता है।
पेसा एक्ट आदिवासियों को सामाजिक क्षेत्रों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अधिकार देता है।
पेसा एक्ट के बाद ग्राम सभाओं की ताकत बढ़ जाती है जल, जंगल, जमीन और संसाधन पर ग्राम सभा का अधिकार होता है।
पेसा कानून के तहत आदिवासियों पर केस करने से पहले पुलिस को ग्राम सभा को जानकारी देनी होगी।
पेसा कानून के तहत गांवों के विवाद को ग्राम सभा के स्तर पर सुलझाया जाएगा।
पेसा कानून के तहत मध्यप्रदेश में अब वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य ग्रामसभा तय करेगी।
पेसा एक्ट के तहत आदिवासियों को प्रभावित करने वाली योजनाओं पर नियंत्रण रखा जा सकेगा।