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लाजवंती एक पौधा जो छूने से सिकुड़ जाता है

लाजवन्ती या छुईमुई एक औषधीय पौधा है। खास बात यह है कि इसको हाथ लगाते ही इसकी पत्तियां सिकुड़ जाती हैं। यही इस बूटी की खास पहचान है। इस प्रजाति के पौधे कई रुपों में मिलते हैं। इसके फूल गुलाबी रंग के तथा छोटे होते हैं।
Chaitanya Das Soni
लाजवंती प्रकृति से ठंडे तासीर की और कड़वी होती है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में लाजवंती के कई फायदे बताए गए हैं, जिनमें कफ पित्त को दूर करना, पित्त] नाक-कान से खून बहना, दस्त, पित्त, सूजन, जलन, अल्सर, कुष्ठ तथा योनि रोगों से आराम दिलाता है।
लाजवंती के पत्ते ग्रन्थि, भगन्दर, गले का दर्द, कटने या छिलने, अल्सर, अर्श या पाइल्स तथा रक्तस्राव (ब्लीडिंग) में लाभ देते हैं। यह मूत्राशय की पथरी, सूजन, गठिया तथा पेशी के दर्द में लाभ देता है।
यह विष का असर कम करने, मूत्रल या ज्यादा मूत्र होना, कब्ज नाशक, एंटीसेप्टिक, रक्तशोधक या खून को साफ करने वाली, कामोत्तेजक, बलकारक, घाव को जल्दी ठीक करने में सहायक होने के साथ-साथ सूजन, विष, डायबिटीज के उपचार में सहायता करती है।
अगर आप मौसम के बदलाव के कारण खांसी से हमेशा परेशान रहते हैं तो लाजवंती से इसका इलाज किया जा सकता है। लाजवंती की जड़ को गले में बाँधने से खांसी में लाभ होता है।
अपच दूर करने में भी लाजवंती काफी फायदेमंद है। खाने-पीने में गड़बड़ी होने पर ही अपच या पेट फूलने की समस्या होती है। 5.10 मिली ग्राम लाजवंती पत्ते के रस को पिलाने से अपच के कारण बुखार, कामला या पीलिया व सभी प्रकार के पित्त संबंधी रोगों में लाभ होता है।
हाइड्रोसिल से दिलाए राहत लाजवंती का पौधा पुरुषों के अंडकोष में पानी भर जाने के कारण यह रोग होता है। इसमें लाजवंती का प्रयोग करने पर जल्दी आराम मिलता है। लाजवंती के पत्तों को पीसकर अंडकोष की सूजन पर लेप करने से लाभ होता है।
साइनस के कष्ट या दर्द से आराम दिलाने में लाजवंती बहुत काम आती है। लाजवंती की जड़ को घिसकर लेप करने से नाड़ीव्रण व व्रण का सूजन कम होता है। लाजवंती के पत्तों को पीसकर लगाने से जीर्ण व्रण व नाड़ीव्रण में लाभ होता है।
माहवारी से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद है लाजवंती महिलाएं लाजवंती का उपयोग मासिक धर्म संबंधी समस्या के दौरन भी कर सकती हैं, क्योंकि यह हार्मोन की अनियमितता को दूर करके माहवारी से जुड़ी समस्याओं के लक्षणों को कम करने में मदद करती है।
बीमारी के लिए लाजवन्ती के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए लाजवन्ती का उपयोग कर रहे हैं, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।.