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वो भारतीय जिन्होंने जीता दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार

विज्ञान, साहित्य, चिकित्सा, अर्थशास्त्र, मानवाधिकार और शांति के क्षेत्र में उच्च कार्य करने वाले व्यक्ति को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है। वहीं, आज आपको बताएंगे वो नाम, जिन्होंने ये पुरस्कार हासिल कर दुनिया में भारत का मान बढाया है।
DEEPAK SAXENA
रविंद्र नाथ टैगोर 1913 में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाला पहले एशियाई और भारतीय थे। गीतांजलि या गीत प्रसाद कविताओं का एक संग्रह के कारण उन्होंने नोबेल पुरस्कार जीता था।
प्रकाश के प्रकीर्णन में अपने विशिष्ट कार्य के लिए भारत के लिए दूसरे नोबेल पुरस्कार विजेता चंद्रशेखर वेंकट रमन थे। उनकी इस खोज के कारण उनके शोध को रमन इफेक्ट या रमन स्कैटरिंग के नाम से भी जाना जाता है।
भारत के लिए तीसरा नोबेल पुरस्कार डॉ. हरगोविंद खुराना ने जीता। जिन्होंने अनुवांशिकी पर अपने विशिष्ट शोध के लिए चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीता।
मदर टेरेसा एक अल्बानियाई भारतीय रोमन कैथोलिक नन और मिशनरी थी। वो महज 19 साल की उम्र में भारत आकर गरीबों की सेवा और जरूरतमंद की मदद में लग गई। साथ ही वो 1979 में वो नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली पहली महिला थीं।
कैलाश सत्यार्थी ने भारत में बाल श्रम के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिसके लिए उन्हें साल 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अमर्त्य सेन भारत के एक अर्थशास्त्री और दार्शनिक है जिन्होंने साल 1998 में अर्थशास्त्र, सामाजिक पसंद सिद्धांत, सामाजिक और आर्थिक न्याय, अकाल अर्थशास्त्र, निर्णय सिद्धांत, के कारण नोबेल पुरस्कार जीता। साथ ही उन्हें 1999 में भारत रत्न दिया गया।
अभिजीत बनर्जी एक भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री, जिनहें 2019 में एस्थर दुफ्लो और माइकल क्रेमर के साथ वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए आर्थिक विज्ञान में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वेंकटरमन राधाकृष्णन ने Thomas A. Steitz और Ada Yonath के साथ मिलकर राइबोसोम की संरचना और उसके कार्य के बारे में अध्ययन किया। जिसके लिए उन्हें साल 2009 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
चंद्रशेखर एक अमेरिकी भारतीय खगोल भौतिकविद् थे। इन्होंने विलियम ए फॉलर के साथ मिलकर स्टार संरचना और विकास की महत्वपूर्ण भौतिक प्रक्रियाओं अध्ययन किया। इसके लिए इन्हें भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से साल 1983 में नवाजा गया।