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भारत के वो प्राचीन वैज्ञानिक, जिनके आगे नतमस्तक हुई आधुनिक साइंस

भारत में प्राचीन ऋषि मुनि तपस्या के साथ साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले भी थे। उन्होंने उन सिद्धांतों का प्रतिपादन उस समय कर दिया। जब विज्ञान इतने आधुनिक स्तर पर नहीं था।
DEEPAK SAXENA
वराहमिहिर- ईसा की 5वीं-6वीं शताब्दी के भारतीय गणितज्ञ एवं खगोलज्ञ थे। वाराहमिहिर ने सबसे पहले बताया कि अयनांश का मान 50.32 सेकेण्ड के बराबर होता है।
आर्यभट्ट- प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। जिन्होंने बताया कि धरती सूर्य का चक्कर लगाती हैं। धरती गोल है। साथ ही इन्होंने दशमलव प्रणाली विकसित की।
सुश्रुत- महर्षि सुश्रुत ने प्लास्टिक सर्जरी, सर्जरी के अविष्कारक और शल्य चिकित्सा के ज्ञाता। इन्होंने सर्जरी का पिता भी कहा जाता है।
चरक- महर्षि चरक त्वचा चिकित्सा के जनक और आयुर्वेदाचार्य थे। वो कुषाण राज्य के राजवैद्य थे। इनके द्वारा रचित चरक संहिता एक प्रसिद्ध आयुर्वेद ग्रन्थ है।
कणाद- महर्षि कणाद एक स्वतंत्र भौतिक विज्ञानवादी थे। उन्होंने परमाण सिद्धांत, गति का सिद्धांत और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के जनक कहे जाते हैं।
बौधायन- बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुल्ब सूत्र के रचयिता थे। वो रेखागणित, ज्यामिति, त्रिकोणमिति के जनक कहे जाते हैं।
महर्षि अगस्त- अगस्त को आकाश में उड़ने वाले गुब्बारे, बिजली के अविष्कारक के रूप में जाना जाता है।