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Khatauli By Election के 10 फैक्टर, जो बदलेंगे यूपी की सियासत

यूपी के मुजफ्फरनगर जिले की खतौली विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव से पूरे प्रदेश की सियासत गर्मा गई है।
Dharmender Kumar
मुजफ्फरनगर की खतौली सीट पर उपचुनाव में RLD-SP ने मदन भैया को उतारा है, 4 बार विधायक रह चुके मदन भैया अपना पहला चुनाव जेल से जीते थे।
खतौली सीट, विधायक विक्रम सिंह सैनी को मुजफ्फरनगर दंगों के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद खाली हुई है, भाजपा ने अभी उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है।
माना जा रहा है और इस बात की पुरजोर संभावना है कि भाजपा विधानसभा सीट से विक्रम सिंह सैनी की पत्नी को चुनाव मैदान में उतार सकती है।
गुर्जर-मुस्लिम बाहुल्य खतौली सीट पर राष्ट्रीय लोकदल 2012 में चुनाव जीती थी और पार्टी के टिकट पर करतार सिंह भड़ाना विधायक चुने गए थे।
खतौली में करीब 28 हजार गुर्जर मतदाता हैं, ऐसे में अगर जाट-मुस्लिम के साथ गुर्जर समुदाय का साथ RLD को मिला, तो भाजपा के लिए मुश्किल होगी।
खतौली पर आरएलडी फिर से अपना कब्जा चाहती है, और इसके लिए आसपास के जिलों मेरठ और बागपत से भी कार्यकर्ताओं की टीम ने डेरा डाल लिया है।
अभी तक की जानकारी के मुताबिक, बीएसपी खतौली उपचुनाव नहीं लड़ेगी। ऐसे में दलित मतदाता किस तरफ जाते हैं, ये भी जीत-हार में एक बड़ा फैक्टर होगा।
यहां रालोद नेता अभिषेक गुर्जर लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन टिकट कटने से वो नाराज हैं, ऐसे में RLD की राह आसान नहीं होगी।
मुजफ्फरनगर दंगों में मारे गए गौरव की मां सुरेश देवी ने भी उपचुनाव के लिए नामांकन खरीदा है। उन्होंने भाजपा पर अनदेखी का आरोप लगाया है।
रालोद उपचुनाव में स्थानीय मुद्दे उठाएगी। जयंत चौधरी ने 5 दिसंबर से पहले गन्ने का भाव तय करने की मांग उठाकर अपना दांव चल दिया है।
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